निशानेबाज फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
नवभारत विशेष

Navbharat Nishanebaaz: एआई का चढ़ने लगा बुखार, न बने बंदर के हाथ तलवार

AI Misuse Risks: एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उसके दुरुपयोग को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। समझदारी और नियंत्रण के साथ एआई का इस्तेमाल विकास का साधन बन सकता है।

अंकिता पटेल

Artificial Intelligence Safety Risks: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमें एआई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डर लग रहा है। कहते हैं वह इंसान के नियंत्रण से बाहर होकर भस्मासुर बन सकती है और 10 वर्ष में मानव जाति को नष्ट कर देगी।'

हमने कहा, 'अफवाहों पर ध्यान मत दीजिए। इंसान ने एआई को बनाया है, एआई ने इंसान को नहीं! अपनी अक्ल पर भरोसा रखिए, नकली बुद्धिमत्ता के फेर में मत रहिए। एआई कभी पूरी तरह इंसानी दिमाग की बराबरी नहीं कर सकती। एआई का समझदारी और विवेक से इस्तेमाल करने से उन्नति होगी और खुशहाली आएगी। उसे कंट्रोल में रखना होगा।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, एक राजा के चेहरे पर बार-बार मक्खी आकर बैठ जाती थी। उसने अपने पालतू बंदर के हाथ में तलवार देकर मक्खी भगाने की ड्यूटी सौंप दी। राजा की नाक पर मक्खी बैठी तो बंदर ने तुरंत चपलता से तलवार चला दी। एआई रूपी बंदर को भी नियंत्रण में रखकर सावधानी से नचाया जाए वरना अनर्थ हो सकता है। एंथ्रोपिक कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि हाल ही उत्तर यमन में एक शत्र निर्माता समूह ने 'क्लाड' नामक ऊंचे दर्जे की एआई का इस्तेमाल कर रॉकेट और प्रक्षेपास्त्र बनाने के लिए मार्गदर्शन सॉफ्टवेयर तैयार करने का प्रयास किया। कंपनी की सुरक्षा इकाई ने समय रहते इसे रोक दिया। जरा सोचिए कि एआई का मिसयूज कर आसानी से विनाशकारी शस्त्र बनाए जा सकते हैं।'

हमने कहा, 'एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई ने इस खतरे को भांपते हुए घोषणा की कि उनकी कंपनी अब एडवांस एआई मॉडल के अनुसंधान व सुरक्षा का मूल्यमापन करने के लिए तीसरे पक्ष के निरीक्षकों को अपने साथ शामिल करेगी। यह ध्यान रखा जाएगा कि एआई का बर्ताव मानवीय हित से सुसंगत है या नहीं। जिस तरह औषधियां बनाते समय जांच पड़ताल की जाती है वैसा ही एआई के संबंध में भी किया जाएगा। उसका जवाबदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इसकी गारंटी कौन लेगा? दुनिया में चंगेजखान, नादिरशाह, हिटलर जैसे बर्बर लोगों का इतिहास रहा है। आज भी कुछ नेताओं पर युद्धोन्माद सवार है। ऐसे सनकी व हिंसक प्रकृति के लोग एआई का जाने कैसा इस्तेमाल करेंगे ? यदि आतंकियों को पालनेवाले देश के शासकों के हाथ एआई लगी तो वह क्या करेंगे?' हमने कहा, 'आगे क्या होगा, मत सोचिए। अभी अपनी जिंदगी निडर होकर आराम से बिताइए क्योंकि जो डर गया, समझो मर गया!'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

भारतीय सेना ने देश में ही क्यों चलाया था सैन्य अभियान? आजादी से जुड़े हैं तार, क्या है ऑपरेशन पोलो की कहानी

Sunita Williams भारत की वो बेटी जिसने दो बार मनाया अतंरिक्ष में जन्मदिन, प्रेरणा से भरी है कहानी

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को दी चुनौती, फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची, नाम और सिंबल पर विवाद तेज

भस्मासुर है कांग्रेस…राहुल को पढ़ना चाहिए अपनी पार्टी का इतिहास, सहयोगियों को खत्म करना आदत: किरेन रिजिजू

तमिलनाडु में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा सोने का छल्ला, CM विजय ने किया ऐलान, वितरण के लिए बनेंगे 107 हब