रमज़ान इस्लाम का सबसे पाक महीना (सौ. AI) 
धर्म

क्यों कहलाता है रमज़ान इस्लाम का सबसे पाक महीना? जानिए इसके पीछे का रहस्य

Ramadan Ka Mahatva In Islam: रमज़ान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस दौरान मुसलमान रोज़ा व नमाज़ अदा करते हैं और इबादत के ज़रिए आत्म-संयम, धैर्य और आध्यात्मिक शुद्धि की ओर बढ़ते है।

सीमा कुमारी

Ramzan Ka Pavitra Mahina Kyon Mana Jata Hai: इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमजान अभी चल रहा है। दुनियाभर के मुसलमान इस महीने में रोजा रखकर नमाज अदा करते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। यह महीना आत्म-संयम, धैर्य, त्याग और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है।

रमज़ान का क्या है आध्यात्मिक महत्व

रमज़ान का महत्व केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी माना जाता है। इस महीने में लोग सुबह सूर्योदय से पहले सहरी करते हैं और पूरे दिन भोजन व पानी से दूर रहते हैं। सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ रोज़ा खोला जाता है। रोज़ा रखने का उद्देश्य केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि अपने मन, वाणी और व्यवहार को भी नियंत्रित रखना होता है।

रमजान को क्यों पाक का महीना कहा जाता है?

मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, रमजान को इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र यानी 'पाक' महीना माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं।

  •  कुरान का अवतरण

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने की एक बरकत वाली रात जिसे 'शब-ए-कद्र' कहा जाता है, अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद पर पवित्र कुरान उतारने का सिलसिला शुरू किया था।

  • सब्र और आत्म-अनुशासन

रमजान केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है। यह महीना सिखाता है कि कैसे अपनी इच्छाओं पर काबू पाया जाए।

  • रोजा रखना

सुबह से शाम तक बिना कुछ खाए-पिए रहना इंसान को धैर्य और संयम सिखाता है।

  • बुराइयों से परहेज

इस दौरान झूठ बोलना, गीबत (पीठ पीछे बुराई) करना और गुस्से पर काबू रखना अनिवार्य माना जाता है।

  • रूहानी पाकीजगी यानी आध्यात्मिक शुद्धता

इस महीने को 'इबादत का मौसम' कहा जाता है। मुसलमान पांच वक्त की नमाज के अलावा रात में विशेष नमाज 'तरावीह' पढ़ते हैं। माना जाता है कि इस महीने में की गई इबादत का पुण्य (सवाब) अन्य महीनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है।

  • हमदर्दी और दान

रमजान हमें उन लोगों के दर्द का एहसास कराता है जो गरीबी के कारण अक्सर भूखे रहते हैं। इसी एहसास के साथ मुसलमान अपनी संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा 'जकात' (दान) के रूप में गरीबों को देते हैं, ताकि वे भी खुशी से ईद मना सकें।

नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने की खारिज, भरना पड़ेगा पीस बॉन्ड

बिहार के सीवान में पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, आठ लोगों की मौत; कई घायल

LAC पर भारत-चीन के बीच क्या बातचीत चल रही है? विदेश मंत्रालय के बयान का पूरा मतलब समझिए

MLC Election 2026 LIVE: चार राज्यों की 28 सीटों पर मतदान खत्म, कब आएंगे नतीजे?

रुला रहा अलनीनो: दलहन-गुड़-शक्कर के भाव आसमान पर, एथनॉल उत्पादन पर लग सकती है रोक!