महादेव क्यों लगाते है अपने शरीर पर भस्म (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

Mahashivratri 2025: आखिर भगवान शिव शरीर पर लगाते है भस्म, क्या है इसके पीछे की पौराणिक कहानी

महाशिवरात्रि की पूजा में वैसे तो भगवान शिव की प्रिय चीजों को अर्पित किया जाता है जिसमें धतूरा, पुष्प, बेल पत्र, दूध, जल, फल आदि। क्या आपने कभी भस्म चढ़ाने के महत्व को समझा है आखिर भगवान शिव क्यों अपने शरीर पर लगाते है।

दीपिका पाल

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि जैसे पावन त्योहार को आने में जहां पर कुछ दिन शेष रह गए है वहीं पर इस पावन दिन पर भगवान शिव की आराधना भक्ति भाव के साथ की जाती है। इस खास दिन पर कुंवारी कन्याओं- युवकों से लेकर दांपत्य जीवन जी रहे लोग भी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखते है। महाशिवरात्रि की पूजा में वैसे तो भगवान शिव की प्रिय चीजों को अर्पित किया जाता है जिसमें धतूरा, पुष्प, बेल पत्र, दूध, जल, फल आदि। क्या आपने कभी भस्म चढ़ाने के महत्व को समझा है आखिर भगवान शिव क्यों अपने शरीर पर लगाते है। शिवपुराण में इसके पीछे एक कहानी प्रचलित मिलती है।

जानिए पौराणिक कथा के बारे में

यहां पर शिवपुराण में भगवान शिव और माता सती से जुड़ी एक कथा वर्णित है। इसके अनुसार, राजा दक्ष की पुत्री का नाम माता सती था जिन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में वरण करने की इच्छा जताई लेकिन दक्ष भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे नहीं मानें। लेकिन माता सती के हठ के कारण दक्ष ने अपनी पुत्री का विवाह महादेव के साथ कर दिया। एक बार की बात है, राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें बेटी सती और दामाद महादेव को आमंत्रित किए बिना सभी देवी-देवताओं को बुलाया था। यह बात माता सती को पता चली तो वह अपने पिता राजा दक्ष के पास पहुंची और नहीं बुलाने का कारण पूछा, इस पर राजा दक्ष ने महादेव को बुरा-भला कह दिया माता सती यह अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकी और अग्निकुंड में कूद गई। यह बात भगवान शिव को पता चली तो वे बहुत क्रोधित हुए और उनके वीरभद्र अवतार ने प्रजापति दक्ष का सिर काट दिया।

माता सती के शरीर को लेकर रहे महादेव

भगवान शिव, माता सती को गोद में लेकर कई दिनों तक भटकते रहे इस दौरान समस्त सृष्टि में भूचाल आ गया था सभी देवता गण घबरा गए। इसके बाद भगवान शिव का ऐसा हाल भगवान विष्णु देख नहीं सके उन्होंने माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए और भगवान शिव के हाथों में शव से निकली राख रह गई। जैसे ही राख महादेव के पास आई उन्होंने अपने शरीर पर लगा दिया इसके बाद से भगवान शिव की पूजा में भस्म का स्थान आया।

भगवान शिव ने इस भस्म के जरिए संदेश दिया कि, संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है। सब कुछ नश्वर है। कोई वस्तु और व्यक्ति चाहे कितना भी सुंदर क्यों न हो, लेकिन उसे एक न एक दिन जलकर राख हो ही जाना है। जीवन का अंतिम सत्य भस्म ही है।

शऱीर को गर्म रखने के लिए लगाते है भस्म

जैसा कि, जानते है भगवान शिव कैलाश पर्वत में निवास करते हैं जहां पर तापमान बेहद ठंडा रहता है। वहीं पर भगवान शिव पूरी तरह से प्रकृति के नियमों का अनुसरण करके मोह-माया से दूर प्राकृतिक तरीकों से रहते हैं। भस्म ज्यादा ठंड होने पर शरीर पर लगाते है ऐसा करने से शरीर गर्म रहता है।

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