मां दुर्गा को क्यों लगाते दही चूड़ा भोग? (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

आखिर विजयादशी पर मां दुर्गा को क्यों दही-चूड़ा का लगता है भोग, जानिए क्या है रहस्य

Maa Durga: नवरात्रि के दौरान, भक्त माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं, प्रार्थना करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद मांगते हैं। इस अंतिम दिन माँ दुर्गा को एक खास प्रसाद-दही चूड़ा चढ़ाया जाता है।

सीमा कुमारी

Vijayadashami 2025: आज पूरे देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के दशमी तिथि के दिन यानी दशहरे के दिन मां दुर्गा की भावभीनी विदाई दी जाती है। नवरात्रि के दौरान माता रानी के भक्त नौ दिनों में मां दुर्गा को अलग-अलग दिनों में विशेष तरह के भोग लगाए जाते है। इसी तरह मां को विदाई देने से पहले उन्हें दही चूड़ा का भोग लगाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य -

विजयादशमी के दिन मां दुर्गा को क्यों लगाते दही चूड़ा भोग? जानें

शुभ और फलदायक माना गया गया है दही चूड़े का भोग

ज्योतिषयों के मुताबिक, मां दुर्गा को दही-चूड़ा का भोग लगाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि, दही और चूड़ा शुभता का प्रतीक होता है। विदाई से पहले मां को इसका भोग लगाना शुभ और फलदायी होता है। कहा जाता है कि, नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा अपने मायके आती है। इन 9 दिनों तक ठहरने के बाद 10वें दिन उन्हें विदाई दी जाती है। विदाई से पहले लोग दही-चूड़ा भोग की रस्म पूरी करते है।

मां के विदाई के दिन दही चूड़ा का लगता भोग

ऐसे में महिलाओं के द्वारा मां दुर्गा को बेटी स्वरूप माना जाता है। जिस कारण लोग उनकी विदाई की रस्म को पूरा करने के लिए दही चूड़ा का भोग लगाती है। हालांकि, धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यात्रा के समय दही खाना लोगों के लिए बहुत शुभ फलदायक होता है और यात्रा भी सुविधाजनक होती है।

कहा जाता है कि दही वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पाचन शक्ति के लिए सहायक होता है और शरीर को शीतल प्रदान करता है। बेटी की विदाई को लेकर कुछ क्षेत्रों में महिलाएं मां देवी को अपनी बेटी की तरह मानती है और दसवीं तिथि के दिन मां का दही चूड़ा से स्वागत करती हैं जैसा कि जब कोई बेटी अपने घर से जाती है। तब से यह परंपरा चलती आ रही है।

ये है मां दुर्गा के विसर्जन का शुभ-मुहूर्त

बता दें कि आज गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को मां दुर्गा के विसर्जन के लिए दो मुहूर्त रहेंगे. पहला मुहूर्त प्रात:काल में था । इसके बाद दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक का समय भी विसर्जन के लिए शुभ रहेगा ।

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