भीष्म अष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

भीष्म अष्टमी क्यों मानी जाती है पुण्यदायी? जानिए व्रत के लाभ

Bhishma Ashtami Significance:भीष्म अष्टमी क्यों खास मानी जाती है? इस पावन व्रत से जुड़े धार्मिक महत्व, पूजा विधि और ऐसे लाभ जानिए, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।

सीमा कुमारी

Bhishma Ashtami Benefits: भीष्म अष्टमी एक पवित्र हिंदू व्रत है, जो महाभारत के महान योद्धा और धर्मप्रिय पितामह, भीष्म जी को समर्पित है। इसे हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल 2026 यह अष्टमी सोमवार, 26 जनवरी को हैं।

यह शुभ एवं पावन तिथि भीष्म जी की धर्म, शौर्य और जीवन के उच्च आदर्शों को याद करने और उनके उपदेशों का अनुसरण करने का प्रतीक है।

भक्त इस दिन व्रत रखकर, भजन-कीर्तन करके और दान-पुण्य करके आध्यात्मिक लाभ, मानसिक शांति और परिवार में समृद्धि प्राप्त करने की कामना करते हैं।

कब मनाई जाएगी भीष्म अष्टमी

ज्योतिष गणना के अनुसार, इस वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस के समापन की बात की जाए, तो यह तिथि 26 जनवरी को रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहने वाली है। इस दिन पर श्राद्ध कर्म के लिए मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा - मध्याह्न समय - सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक

क्यों खास है भीष्म अष्टमी

भीष्म पितामह की याद में – भीष्म जी ने अपने धर्म, शौर्य और जीवन की प्रतिज्ञाओं से हमें सीख दी। यह व्रत उनके आदर्शों और जीवन दृष्टि को सम्मानित करता है।

धार्मिक महत्व – मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और दान पुण्य बहुत फलदायक होता है।

आध्यात्मिक अनुशासन – व्रत करने से मन और आत्मा को शांति मिलती है, और भक्त धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहते हैं।

भीष्म अष्टमी व्रत के लाभ

धार्मिक लाभ – व्रत करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। सफलता और सम्मान – कहा जाता है कि यह व्रत जीवन में सम्मान, प्रतिष्ठा और सफलता दिलाने में मदद करता है।

आध्यात्मिक शक्ति – नियमित व्रत और भजन-कीर्तन से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है।

परिवारिक शांति – इस दिन परिवार के elders का आशीर्वाद लेना और घर में पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

दान-पुण्य का फल – भोजन, वस्त्र और आवश्यक चीजों का दान करने से जीवन में समृद्धि आती है।

व्रत करने की रीति

दिनभर उपवास रखें और माता-पिता या गुरुओं के आशीर्वाद लें।

भीष्म जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।

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