मोहिनी एकादशी(सौ.सोशल मीडिया) 
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मोहिनी एकादशी के दिन इन 5 बातों का रखें ध्यान, वरना कंगाल होने में नहीं लगेगी देर!

ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रीहरि की पूजा करता है, उनके धन और वैभव में वृद्धि होती है। साथ ही, घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी के दिन कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए।

सीमा कुमारी

Mohini Ekadashi 2025: आज 08 मई को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मोहिनी एकादशी का व्रत हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा होती है।

ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रीहरि की पूजा करता है, उनके धन और वैभव में वृद्धि होती है। साथ ही, घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी के दिन कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए-

मोहिनी एकादशी के दिन कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए-

ज्योतिषयों के अनुसार, मोहिनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। मान्यता है कि एकादशी पर माता तुलसी व्रत रखती हैं। इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।

जो लोग मोहिनी एकादशी का उपवास निर्जला रखते हैं, उन्हें इस दिन कुछ भी खाने-पीने से बचना चाहिए।

कहते है इस दिन साबुन से नहीं नहाना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है।

अगर आप एकादशी पर उपवास कर रहे हैं, फिर भी एकादशी के दिन चावल या इससे से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन किसी के बारे में बुरा बोलने से बचना चाहिए, साथ ही किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए।

इस दिन तामसिक चीजों जैसे मांस, शराब, लहसुन, प्याज आदि के सेवन से बचना चाहिए।

एकादशी के दिन तुलसी पर जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि इस दिन तुलसी माता एकादशी व्रत रखती हैं, जिससे उनका व्रत खंडित हो सकता है।

क्या है मोहिनी एकादशी का महत्व

आपको बता दें, पौराणिक मान्यता के मुताबिक, मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत का पान कराया था। तब विष्णु जी को मोहिनी स्वरूप सत्य की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन व्रत रखने से हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। ऐसा भी माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी विजय पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत रखा था। इसलिए सनातन धर्म में भी इस व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

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