इस दिन साल की आखिरी पूर्णिमा (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

गुरुवार को है 'मार्गशीर्ष पूर्णिमा', विधिवत पूजा से बटोर लीजिए पुण्य-प्रताप, जानिए क्यों है ये ख़ास

Margashirsha Purnima Kab Hai 2025:इस साल 4 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा है। यह 2025 की अंतिम पूर्णिमा भी है। इस दिन भगवान विष्णु, मां अन्नपूर्णा और सूर्य देव की पूजा का विधान है।

सीमा कुमारी

Margashirsha Purnima Muhurat : साल की आखिरी पूर्णिमा जल्द आने वाली है। साल में आने वाली 12 पूर्णिमासी में से मार्गशीर्ष पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार यह पूर्णिमा 4 दिसंबर को मनाया जा रहा हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। इतना ही नहीं इस दिन किए गए दान का पुण्य अन्य पूर्णिमा की तुलना में 32 गुना अधिक मिलता है इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहते हैं।

इस शुभ अवसर पर भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। इस पूर्णिमा को "मोक्षदायिनी पूर्णिमा" भी कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। चलिए आपको बताते हैं इस साल ये पूर्णिमा कब है।

इस दिन साल की आखिरी पूर्णिमा

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को 04 बजकर 43 मिनट पर होगा। ऐसे में 04 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

कैसे करें मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा

  • इस पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनाराण की पूजा की जाती है।
  • प्रातःकाल उठकर भगवान का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • स्नान के बाद सफेद कपड़े पहनें और फिर आचमन करें।
  • इसके बाद ऊँ नमोः नारायण कहकर श्रीहरि का आह्वान करें।
  • सत्यनारायण भगावन के चित्र या तस्वीर को पाट पर स्थापित करके आसन, गंध और पुष्प आदि
  • भगवान को अर्पण करें।
  • भगवान को पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें और उनकी आरती उतारें।
  • इसके बाद भगवान सत्यनाराण की कथा सुनें।
  • आप चाहें, तो हवन भी कर सकते हैं। हवन में तेल, घी और बूरा आदि की आहुति दें।
  • रात्रि को भगवान नारायण की मूर्ति के पास ही शयन करें।
  • व्रत के दूसरे दिन किसी गरीब को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा करने के बाद व्रत का पारण करें।

क्या है सनातन धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा की महिमा

सनातन धर्म में इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष महत्व बताया गया है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के शुभ दिन पर हरिद्वार, बनारस, मथुरा और प्रयागराज आदि जगहों पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान और तप करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन हरिद्वार, बनारस, मथुरा और प्रयागराज आदि जगहों पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान और तप आदि करते हैं। इस दिन दान देने का खासा महत्व है। किसी जरूरतमंद को वस्त्र, भोजन आदि का यथाशक्ति दान करें। इस दिन किए जाने वाले दान का फल अन्य पूर्णिमा की तुलना में 32 गुना अधिक मिलता है, इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

पौराणिक मान्याताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह से ही सतयुग काल आरंभ हुआ था। इस दिन तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। इस भगवान सत्यनारायण की पूजा करना और कथा सुनने का महत्व है। यह परम फलदायी बताई गई है।

भाग सकते हो, छिप नहीं सकते..., कश्मीर में सुरक्षाबलों ने लश्कर के पाकिस्तानी कमांडर यासिर को किया ढेर

सहारनपुर मस्जिद पर UP में गरमाई सियासत, मायावती ने की बुलडोजर कार्रवाई रोकने की मांग

Teacher’s Day पर PM मोदी की शिक्षकों संग खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग से लेकर बच्चों के टैलेंट तक पर हुई चर्चा

Operation Chakra 6: डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल! 3 महीने बंधक बनाकर ऐंठे 42.36 करोड़, CBI ने दबोचे 3 एजेंट

शिक्षक दिवस पर डॉ. राधाकृष्णन को नमन, योगी-गडकरी समेत कई नेताओं ने दी शिक्षकों को शुभकामनाएं