भूतड़ी अमावस्या (सौ.AI)  
धर्म

चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या? जानिए इस खास अमावस्या के दिन किन बातों से बचें?

Chaitra Amavasya 2026 Date: भूतड़ी अमावस्या को विशेष रूप से संवेदनशील तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है, इसलिए कुछ गलतियों से बचना जरूरी बताया गया है।

सीमा कुमारी

Bhutdi Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में हर माह की पूर्णिमा तिथि और अमावस्या तिथि का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व होता है। जहां पूर्णिमा पर चारों ओर छाई चांदनी सकारात्मकता को दर्शाती है वहीं अमावस्या की काली रात नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है।

वैसे तो हर मास में आने वाली अमावस्या तिथि अपने आप में विशेष होती है। लेकिन चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

कब है भूतड़ी अमावस्या

पंचांग के अनुसार, इस बार यह अमावस्या गुरुवार, 19 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 18 मार्च की सुबह 08:25 बजे शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार स्नान-दान और मुख्य पूजा 19 मार्च को मान्य होगी, हालांकि श्राद्ध के कार्य 18 मार्च को करना उचित है।

चैत्र अमावस्या क्यों कही जाती है ‘भूतड़ी अमावस्या

लोक मान्यता के अनुसार, चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक शक्तियां या फिर कहें कि बुरी और अतृप्त आत्माओं का प्रभाव बढ़ जाता है। जिनसे बचने के लिए इस तिथि पर तमाम तरह की पूजा की जाती है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, ये दिन प्रमुख रूप से पितरों को याद करने का है। इसे ‘पितृ अमावस्या’ भी माना जाता है।

भूतड़ी अमावस्या पर न करें ये काम

निजी स्वच्छता के काम: बाल धोना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना इस दिन वर्जित माना जाता है।

तामसिक भोजन व नशा: मांस-मछली, अंडा और नशीले पदार्थों का सेवन न करें, सात्विक भोजन करें।

सुनसान जगहों पर जाना: नकारात्मक शक्तियों के हावी होने के कारण, कमजोर इच्छाशक्ति वाले लोगों को शाम/रात में सुनसान जगहों, कब्रिस्तान या श्मशान के आस-पास नहीं जाना चाहिए।

अनजान चीजों को छूना: रास्ते में पड़ी अनजान चीजों जैसे कपड़े, गुड़िया, पैसे को हाथ या पैर न लगाएं।

पितरों का अपमान: इस दिन भूलकर भी पितरों या घर के बुजुर्गों का अपमान न करें, अन्यथा पितृ दोष लगता है।

शुभ कार्य: नए घर में प्रवेश, विवाह या कोई भी नया व्यवसाय यानी शुभ कार्य शुरू न करें।

पशु-पक्षियों को परेशान करना: गाय, कुत्ता, कौआ या अन्य पशु-पक्षियों को प्रताड़ित न करें, उन्हें भोजन दें।

इन बातों का पालन कर आप नकारात्मक ऊर्जा से बच सकते हैं।

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