विश्वकर्मा पूजा 2026 फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Vishwakarma Puja 2026: स्वर्ग से सोने की लंका तक, भगवान विश्वकर्मा ने बनाई थीं ये 5 अद्भुत चीजें

Vishwakarma Puja: पौराणिक कथाओं के अनुसार, विश्वकर्मा भगवान ने हर सुंदर वस्तु का निर्माण किया है। स्वर्ग की नगरी से सोने की लंका और द्वारका तक, जानिए उनकी 5 अद्भुत रचनाएं।

रीता राय सागर

Vishwakarma Jayanti: विश्वकर्मा पूजा पर हर साल मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा की जाती है, लेकिन विश्वकर्मा भगवान का संबंध केवल इन्हीं चीजों से नहीं है बल्कि देवताओं के सबसे बड़े शिल्पकार के तौर पर भी उन्हें जाना जाता है। पौराणिक कथाओं में उनकी बनाई ऐसी कई रचनाओं का जिक्र मिलता है, जिनकी भव्यता देखते ही बनती है।

कहा जाता है कि स्वर्ग की नगरी से लेकर सोने की लंका तक, कई अद्भुत रचनाओं के पीछे भगवान विश्वकर्मा का ही हुनर था। आइए जानते हैं उनकी 5 अद्भुत और सुंदर रचनाओं के बारे में।

स्वर्ग की नगरी

स्वर्गलोक

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए भव्य स्वर्ग भवनों का निर्माण किया था। कथाओं में दिए गए स्वर्ग के वर्णन के अनुसार, स्वर्ग को खूबसूरत महलों, विशाल सभाओं और अद्भुत वास्तुकला से सजाया गया था। इसलिए उन्हें देवताओं का दिव्य शिल्पकार कहा जाता है।

सोने की लंका भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाई थी

सोने की लंका

शिव जी द्वारा पार्वती जी के लिए बनाया गया स्वर्ण भवन और फिर उससे बनी सोने की लंका का जिक्र तो हमने कई धार्मिक कथाओं में सुनी है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की सबसे चर्चित रचनाओं में सोने की लंका का नाम आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लंका का निर्माण विश्वकर्माजी ने किया था। बाद में यह नगरी रावण के अधिकार में आ गई। रामायण में लंका की भव्यता और सोने से सजे महलों का वर्णन मिलता है।

समुद्र के बीच बसाई गई थी द्वारका

द्वारका

भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका के शिल्पकार भी भगवान विश्वकर्मा है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण के कहने पर विश्वकर्माजी ने समुद्र के किनारे एक भव्य नगरी का निर्माण किया था। द्वारका को बेहद सुंदर, समृद्ध और सुरक्षित नगरी के रूप में बताया गया है। सोचिए जब श्रीकृष्ण की छवि इतनी मनमोहक थी, तो द्वारका कितनी भव्य और अद्भुत होगी।

इंद्र का वज्र भी बनाने का श्रेय

इंद्र का वज्र

विश्वकर्माजी का हुनर केवल महल और नगर बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र भी बनाया, जिनका वर्णन पुराणों में मिलता है। इंद्र के प्रसिद्ध वज्र भी विश्वकर्मा जी के कौशल का नमूना है। इसी वज्र का इस्तेमाल इंद्र ने हनुमान जी पर किया था, जब वे सूर्य को खाने चले थे और इसी वज्र से वृत्रासुर पर प्रहार किया गया था।

देवताओं के महल और दिव्य भवन

महल

कई पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के अलग-अलग महलों और भवनों का निर्माता बताया गया है। उनकी शिल्पकला इतनी अद्भुत मानी जाती है कि उन्हें देवताओं का वास्तुकार कहा गया। इसी वजह से आज भी निर्माण, कारीगरी, मशीन और तकनीकी काम से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का खास महत्व हैं।

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