Vat Savitri Vrat Benefits : हर साल की इस बार भी वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा श्रद्धा भक्ति के साथ रखा जाने वाला है। इस साल 2026 वट सावित्री का व्रत 16 मई को रखा जाएगा। वट सावित्री का पावन व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
धर्मग्रथों में वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat)को सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक बताया गया हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
ज्योतिषयों के अनुसार, आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए वट सावित्री व्रत पर माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस पूजा में माता लक्ष्मी को पीले रंग की 11 कौड़ियां चढ़ाएं। अगर पीली कौड़ियां नहीं हैं तो सफेद कौड़ियों पर हल्दी लगाकर चढ़ा सकते हैं। इससे आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल सकती हैं।
कहते है वैवाहिकजीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का सामान उपहार स्वरूप दें। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम बढ़ता है। कम से कम 11 महिलाओं को इस दिन सुहाग का सामान उपहार स्वरूप देना चाहिए।
अगर बहुत प्रयास के बाद भी वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं है तो इस दिन वट वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। उनकी प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और पति के साथ वट वृक्ष की 11 बार परिक्रमा करें. मान्यता है कि इस उपाय से वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
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वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा करते समय अपने मन में पति की लंबी उम्र और उनकी सफलता की प्रार्थना करें। माना जाता है कि ऐसा करने से पति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ की एक छोटी सी जड़ को तोड़कर उसे गंगाजल से धो लें। अब इसे एक पीले या लाल कपड़े में बांधकर अपने पास रखें या अपने हाथ में बांध लें। यह जड़ सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और पति-पत्नी को बुरी नजर से बचाती है।