वट पूर्णिमा व्रत (सौ.AI) 
धर्म

Vat Purnima 2026: वट पूर्णिमा पर बरगद के पेड़ में क्यों लपेटा जाता है धागा? जानें इसके पीछे की मान्यता

Vat Purnima 2026 Spiritual Importance: वट पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर उसके चारों ओर धागा लपेटती हैं। यह परंपरा माता सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ी मानी जाती हैं।

सीमा कुमारी

Vat Purnima Mahatva: हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ महीने का बड़ा महत्व है। खासतौर पर, इस महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा है। क्योंकि, पूर्णिमा के दिन सुहागिन महिलाओं का मुख्य पर्व वट पूर्णिमा मनाया जाता है। इस बार वट पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जा रही है।

वट सावित्री की तरह ही वट पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाता है। दोनों व्रत का महत्व, पूजा विधि, कथा समान होते है। केवल अंतर यह होता है कि, सावित्र व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है और वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को रखा जाता है। दोनों की ही व्रत पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते है।

वट पूर्णिमा व्रत कहां- कहां मनाया जाता है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वट पूर्णिमा व्रत उत्तर भारत में यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत राज्यों में मनाया जाता है। वहीं अन्य राज्यों में अमांत चंद्र कैलेंडर का पालन होता है। इसी कारण से उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत 15 दिन पहले ज्येष्ठ अमावस्या पर और अन्य राज्यों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट पूर्णिमा व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रतों में समान नियम, कथा और पूजा-विधि का पालन किया जाता है।

ज्येष्ठ मास वट पूर्णिमा की तारीख

साल 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को सुबह 03:06 बजे होगी और यह 30 जून को सुबह 05:26 बजे तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 07:16 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर 29 जून को ही ज्येष्ठ पूर्णिमा, वट पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा।

वट पूर्णिमा व्रत 2026 के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4:06 बजे से 4:46 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:57 बजे से 12:52 बजे तक

कैसे करें वट पूर्णिमा पूजा विधि

  • वट पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करके लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • इस दिन महिलाओं को मुख्य रुप से 16 श्रृंगार करना चाहिए।
  • इसके बाद एक बांस की टोकरी लें और सात प्रकार के अनाज, फल, फूल, रोली, कुमकुम, कच्चा सूत, दीपक, सास के लिए साड़ी और श्रृंगार सामग्री आदि सामग्री रख लें।
  • इसके बाद वट वृक्ष के पास जाकर दीपक जलाएं और वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेट दें।
  • अब बरगद के पेड़ पर कुमकुम, हल्दी से तिलक करें। चने और गुड़ का प्रसाद अर्पित करें।
  • फिर पति के पैर छूकर उन्हें प्रसाद दें और भोग कराएं और बांस के पंखे से हवा करें।

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