सत्यनारायण व्रत कथा (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

आज ज्येष्ठ पूर्णिमा और बड़ा मंगल का दुर्लभ शुभ योग, विधिवत पूजा से सभी समस्याओं का होगा नाश, जानिए किनकी पूजा है जरूरी

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा और बड़े मंगलवार का बहुत अधिक महत्व है और दोनों के संयोग से यह दिन और भी शुभ और शक्तिशाली बन गया है। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत कथा सुनना बड़ा शुभ एवं फलदायी बताया गया हैं।

सीमा कुमारी

आज ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा के साथ आखिरी बड़ा मंगल भी मनाया जा रहा है। इस लिहाज से यह दिन और भी शुभ हो गया है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा और बड़े मंगलवार का बहुत अधिक महत्व है और दोनों के संयोग से यह दिन और भी शुभ और शक्तिशाली बन गया है।

मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ, स्नान- ध्यान करने से इंसान के कष्टों का निवारण होता है। ऐसे में हम आपको एक ऐसा व्रत और कथा के बारे में बता रहे हैं जिनको करके आप मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं और कलयुग में सांसारिक दुखों का निवारण कर सकते है। आइए जानते हैं इस बारे में-

क्या है सत्यनारायण व्रत कथा की महिमा

हिन्दू धर्म शास्त्र क अनुसार, कलयुग में मनुष्यों के कष्ट निवारण के लिए सत्यनारायण व्रत कथा महा उपाय के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही इंसान मोक्ष प्राप्त करके बैकुंठ धाम में जाता है।

स्कंद पुराण में सत्यनारायण भगवान की कथा का है उल्लेख

आपको बता दें, सत्यनारायण भगवान की कथा का उल्लेख हमें स्कंद पुराण में भी मिलता है। जिसमें विष्णु जी भगवान नारद को यह कथा सुना रहे हैं और इस कथा का महत्व भी बता रहे है। ऐसा माना जाता है कि अगर आप पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करते हैं तो आपको अपने व्रत का पूर्ण फल तो मिलता ही है, साथ में मोक्ष की प्राप्ति के भी द्वार खुल जाते हैं।

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कैसे करें सत्यनारायण व्रत कथा

सनातन धर्म में पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत कथा सुनना बड़ा शुभ एवं फलदायी बताया गया है। आप पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह जल्दी स्नान कर लें। साफ सुथरे कपड़े पहनकर आप सत्यनारायण भगवान की पूजा की तैयारी करें।

एक चौकी स्थापित करें, जिस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा सकते हैं। चौकी पर सत्यनारायण भगवान की तस्वीर या प्रतिमा रखें। पूजा सामग्री में पान, सुपारी, रोली, मौली, पीले और सफेद पुष्प, मौसमी फल, खासकर केले पूजा में जरूर होने चाहिए।

पूजा की सारी तैयारी करने के बाद लक्ष्मी नारायण की प्रतिमा के साथ चौकी पर सब यथावत सजा दें। अब भाई बंधुबांधवों के साथ विधि विधान से सत्यनारायण भगवान की कथा वाचन करें।

ऐसे लगाएं भोग

सत्यनारायण व्रत कथा में भोग के रूप में पंजीरी और चरणामृत को जरूर बनाएं और इसका भोग लगाएं। अपने बंधुबांधवों के संग उसे ग्रहण करें। अगर संभव हो सके तो अपने भाई बंधु-बांधवों यानी आस पास के लोगों के साथ ही इस कथा को करें।

इन बातों का रखें ख्याल

पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण पूजा के दौरान भक्तगण उपवास करें। स्नान ध्यान, पूजा करें और भूलकर भी तामसिक भोजन का उपयोग न करें, ना ही किसी से अनावश्यक लड़ाई झगड़ा करें। ऐसा करने से आपको इस दिन के व्रत का पूर्ण फल मिलेगा। सुख सौभाग्य की प्राप्ति होगी और आपके मोक्ष द्वार खुल जाएंगे।

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