अक्टूबर 2026 का दूसरा रोहिणी व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।
जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है।
श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार उपवास, नवकार मंत्र जाप और धार्मिक साधना करते हैं।
व्रत के नियमों का पालन करते समय अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखें।
October Rohini Vrat 2026: जैन धर्म में रोहिणी व्रत को श्रद्धा, संयम और साधना से जुड़ा व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने रोहिणी नक्षत्र से संबंधित गणना के आधार पर रखा जाता है। अक्टूबर 2026 में यह व्रत दूसरी बार 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा।
इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करने और धार्मिक नियमों का पालन करने की परंपरा है। आइए जानते हैं रोहिणी व्रत की तारीख, इसका महत्व और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
जैन पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2026 का पहला रोहिणी व्रत 1 अक्टूबर को था, जबकि दूसरा रोहिणी व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस व्रत की तिथि रोहिणी नक्षत्र और स्थानीय पंचांग की गणना के आधार पर निर्धारित होती है। इसलिए पूजा या उपवास की तैयारी करने से पहले अपने शहर के पंचांग अथवा जैन मंदिर से जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
रोहिणी व्रत जैन समुदाय में प्रचलित एक विशेष उपवास है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धालु भगवान वासुपूज्य की आराधना करते हैं। कई परिवारों में महिलाएं पति और परिवार के कल्याण की कामना से यह व्रत रखती हैं। इसके साथ ही, व्रत को आत्मसंयम, अनुशासन और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर भी माना जाता है। इससे जुड़े धार्मिक फल आस्था और परंपरा का विषय हैं।
इस दिन जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान की प्रतिमा के सामने प्रार्थना करते हैं। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पुष्प, चंदन और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। पूजा के दौरान नवकार मंत्र का जाप और धार्मिक पाठ भी किया जाता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर पूजा और संकल्प करते हैं। उपवास के नियम परिवार और जैन परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं, जबकि अन्य निर्धारित नियमों के अनुसार आहार लेते हैं। व्रत के साथ संयम, सदाचार और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों को भी महत्व दिया जाता है।
रोहिणी व्रत रखते समय अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। उपवास के नियमों को समझकर ही संकल्प लें और जरूरत पड़ने पर परिवार के अनुभवी सदस्यों या जैन धर्मगुरु से मार्गदर्शन लें। इस दिन का उद्देश्य श्रद्धा और आत्मसंयम के साथ धार्मिक परंपरा का पालन करना है।