शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।
प्रचलित कथा में व्यापारी के बेटे पर आई विपत्तियों और प्रदोष व्रत से जुड़ी मान्यता का वर्णन है।
पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ें या सुनें और भगवान शिव की आरती करें।
Pradosh Vrat Katha in Hindi: शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:35 बजे से शुरू होकर 24 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:36 बजे तक रहेगी। इंदौर में प्रदोष काल शाम करीब 5:55 बजे से शुरू होगा।
इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद व्रत कथा पढ़ी और सुनी जाती है। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी की आराधना सुख-शांति और सौभाग्य की कामना से की जाती है।
प्राचीन समय में एक नगर में तीन मित्र रहते थे। उनमें से एक राजकुमार था, दूसरा ब्राह्मण का पुत्र और तीसरा व्यापारी का बेटा। राजकुमार और ब्राह्मण पुत्र का विवाह हो चुका था, जबकि व्यापारी के बेटे का विवाह तो हुआ था, लेकिन उसकी पत्नी अभी मायके से ससुराल नहीं आई थी।
एक दिन मित्रों के बीच बातचीत के दौरान ब्राह्मण पुत्र ने कहा कि पत्नी के बिना घर सूना लगता है। यह सुनकर व्यापारी के बेटे ने भी अपनी पत्नी को मायके से लाने का निश्चय कर लिया। जब उसने अपने माता-पिता को बताया, तो उन्होंने समझाया कि उस समय शुक्र अस्त है और ऐसी स्थिति में बहू को विदा कराकर लाना उचित नहीं माना जाता। लेकिन व्यापारी का बेटा अपनी जिद पर अड़ा रहा।
अगले दिन वह पत्नी को लेने ससुराल पहुंच गया। वहां भी घरवालों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार पत्नी को विदा कर दिया गया। रास्ते में उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल को चोट लग गई। दोनों पति-पत्नी भी घायल हो गए। आगे चलने पर लुटेरों ने उनका सामान और धन छीन लिया।
किसी तरह दोनों घर पहुंचे, लेकिन परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। कथा के अनुसार, घर पहुंचने के बाद व्यापारी के बेटे को सांप ने डस लिया। वैद्य ने उसकी हालत गंभीर बताई और कहा कि उसके बचने की उम्मीद कम है।
यह सुनकर उसके मित्र ब्राह्मण पुत्र ने परिवार को शुक्रवार प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। उसने व्यापारी के बेटे को पत्नी के साथ ससुराल लौट जाने के लिए भी कहा। परिवार ने उसकी बात मान ली। ससुराल पहुंचने के बाद व्यापारी का बेटा स्वस्थ हो गया और उसकी परेशानियां दूर हो गईं।
शुक्र प्रदोष की इस लोक प्रचलित कथा में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, धैर्य और बड़ों की सलाह का महत्व बताया गया है। व्रत करने वाले भक्त इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करके परिवार की सुख-शांति और सौभाग्य की प्रार्थना करते हैं। पूजा के बाद कथा सुनकर आरती की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है।