Shukra Pradosh Vrat Importance: शुक्रवार, 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। शिव-पार्वती की कृपा पाने के लिए हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता हैं। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना संध्याकाल में करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिव पूजन करने से साधक को सभी भय से छुटकारा मिलता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। इस दिन कुछ गलतियों को करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
शिवपुराण में बताया गया है कि,प्रदोष व्रत के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष व्रत के दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से महादेव नाराज हो सकते हैं और व्रत खंडित हो सकता है।
शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह की गलती को करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं और जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े न पहनें। इस दिन शुक्रवार है, तो ऐसे में आप सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहन सकते हैं।
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प्रदोष व्रत के दिन घर में किसी से वाद-विवाद भूलकर भी नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी महिला और कन्या का अपमान न करें।
प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजन करने के लिए प्रदोष काल को शुभ माना जाता है। इसलिए प्रदोष काल के दौरान भूलकर भी सोना नहीं चाहिए।
प्रदोष व्रत सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है और यह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिन्हें महादेव के रूप में पूजा जाता है। यह व्रत हर महीने दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।