Highlights:
शरद पूर्णिमा पर पूजा के लिए घर और मंदिर की सफाई करें।
मां लक्ष्मी को फूल, दीपक और मिठाई अर्पित करें।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा का पालन कर सकते हैं।
खीर को ढककर रखें और खाने से पहले उसकी स्वच्छता का ध्यान दें।
पूजा-पाठ और दान अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार करें।
Sharad Purnima Puja Rules: इस साल 2026 शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जा रही है। इस दिन चंद्रमा की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और खीर बनाने की परंपरा है। इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। अगर आप भी इस दिन पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो जान लें 7 जरूरी बातें, जिनसे पूजा को व्यवस्थित और परंपरानुसार कर सकते हैं।
शरद पूर्णिमा पर पूजा से पहले घर और पूजा स्थल को साफ करना अच्छा माना जाता है। पूजा की जगह पर मां लक्ष्मी और चंद्रमा की आराधना के लिए जरूरी सामग्री व्यवस्थित रखें। स्वच्छ वातावरण में पूजा करने से मन भी शांत रहता है।
इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार फल या मिठाई का भोग लगाएं। पूजा की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार रखी जा सकती है।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। कई लोग रात में चंद्रमा के दर्शन करके जल अर्पित करते हैं। अर्घ्य देते समय सुरक्षित जगह पर खड़े रहें और अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार पूजा करें।
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर भगवान को भोग लगाने की परंपरा है। दूध और चावल से बनी खीर को साफ बर्तन में तैयार करें। यदि इसे चांदनी में रखने की परंपरा निभाते हैं, तो बर्तन को ढककर रखें और खीर को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।
इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, चावल, दूध या वस्त्र दान करने की परंपरा है। दान अपनी आर्थिक स्थिति और इच्छा के अनुसार करें। किसी पर दान करने का दबाव नहीं होना चाहिए।
पूजा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और मन की शांति है। इसलिए महंगी सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है। साधारण पूजा सामग्री से भी अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
कुछ परिवारों में शरद पूर्णिमा की रात जागरण करने की परंपरा है। लेकिन रातभर जागना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। अपनी सेहत और दिनचर्या को ध्यान में रखकर पूजा करें।