Shiv Mantra: हिंदू धर्म में भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और पूजनीय देवताओं में से एक हैं। भगवान शिव सृष्टि के रचयिता और संहारक दोनों माने जाते हैं। शिव अघोरी भी है और योगी भी हैं।
माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद हमारे जीवन में गहरी आंतरिक शांति, नकारात्मकता का नाश और मोक्ष की प्राप्ति मिलती है। भगवान को समर्पित कुछ शक्तिशाली मंत्र हैं, जो भक्त पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से रोज इन मंत्रों का जाप करते हैं, उन्हें निश्चित रूप से महादेव की दिव्य कृपा प्राप्त होती है। आइए, इन मंत्रों, उनके अर्थ और उनसे मिलने वाले लाभ के बारे में जानते हैं।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!!
ॐ: (प्रणव) सर्वोच्च ईश्वर का प्रतीक।
तत्पुरुषाय: उस परम पुरुष को।
विद्महे: हम जानते हैं या ध्यान करते हैं।
महादेवाय: देवों के देव महादेव को।
धीमहि: हम ध्यान करते हैं।
तन्नो: वे।
रुद्र: भगवान शिव।
प्रचोदयात्: हमें ज्ञान और बुद्धि की ओर प्रेरित करें।
हम उस परम पुरुष का ध्यान करते हैं और देवों के देव महादेव का स्मरण करते हैं। हे भगवान रुद्र! आप हमें प्रेरित करें और हमारी बुद्धि तथा मन को प्रकाशित करें।
ॐ नमः शिवाय!!
ॐ: यह ब्रह्मांड की सर्वोच्च ध्वनि है। इसे सृष्टि का सार माना जाता है।
न: यह पृथ्वी तत्व का प्रतीक है।
म: यह जल तत्व का प्रतीक है।
शि: यह अग्नि तत्व का प्रतीक है।
वा: यह वायु तत्व का प्रतीक है।
य: यह आकाश तत्व का प्रतीक है। इस पंचाक्षरी मंत्र का पूर्ण अर्थ है- मैं उस परम कल्याणकारी चेतना, भगवान शिव को नमन करता हूँ, जो ब्रह्मांड के पांचों तत्वों और संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं।
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम् उर्वारुकमि बंधनान मृत्योर् मुक्षीय मामृतात्!!
त्र्यम्बकम्: तीन नेत्रों वाले (भगवान शिव)
यजामहे: हम पूजा करते हैं
सुगन्धिं: सुगंधित, जो चारों ओर अपनी दिव्यता और कृपा फैलाते हैं
पुष्टिवर्धनम्: जो सभी का पोषण करते हैं और शक्ति व स्वास्थ्य बढ़ाते हैं
उर्वारुकमिव: एक ककड़ी की तरह
बन्धनान्: बेल के बंधन से
मृत्योर्मुक्षीय: मृत्यु से मुक्ति मिले
माऽमृतात्: ताकि मोक्ष से वंचित न रहें
कराचरण कृतम् वा काया जम कर्मजम् वा श्रवणनयनजम् वा मानसम् वा पारधाम विहितम् विहितम् वा सर्व मेतत् क्षमास्व जय जय करुणाअबधे श्री महादेव शम्भो!!
यह एक क्षमा प्रार्थना मंत्र है, जिसका अर्थ है- हे महादेव, हे शंभु! मेरे हाथों और पैरों द्वारा किए गए, मेरी वाणी या शरीर द्वारा उत्पन्न, मेरे कर्मों द्वारा, मेरे कानों और आँखों द्वारा, अथवा मेरे मन द्वारा जो भी अपराध हुए हों...चाहे वे जाने-अनजाने में हुए हों, करने योग्य कार्यों के रूप में हुए हों या न करने योग्य कार्यों के रूप में हुए हों, हे दया के सागर मेरे आराध्य महादेव उन सभी अपराधों को क्षमा कर दीजिए। हे महादेव, आपकी जय हो, जय हो!