संतान सप्तमी (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

'संतान सप्तमी व्रत' अगस्त के अंतिम हफ्ते 'इस' तिथि को, विधिवत पूजा से संतानप्राप्ति के बनेंगे योग

Santan Saptami: संतान सप्तमी व्रत संतान और उसकी मंगलकामना के लिए रखा जाता है। इस व्रत में भगवान शंकर और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। इस व्रत को स्त्री व पुरुष दोनों ही रख सकते है।

सीमा कुमारी

Santan Saptami 2025: संतान सप्तमी व्रत हर साल राधा अष्टमी के एक दिन पहले और जन्माष्टमी के 14 दिन बाद मनाया जाता है। इस साल संतान सप्तमी का व्रत शनिवार, 30 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में इस दिन व्रत रखने का खास महत्व होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि, इस दिन व्रत रखने व विधि पूर्वक शिव-पार्वति की पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख का वरदान मिलता है। साथ ही उन्हें महादेव और मां पार्वती के आर्शीवाद से कार्तिकेय और श्रीगणेश जैसी तेजस्वी संतान की प्राप्ति होती है।

वहीं जिन महिलाओं को संतान प्राप्त है उन संतानों की आयु लंबी व उन्नति प्राप्त होती है। आइए जानें संतान सप्तमी का शुभ मुहर्त और पूजा विधि

ये संतान सप्तमी 2025 व्रत का शुभ मुहर्त

सप्तमी तिथि आरंभ- 29 अगस्त, रात 08 बजकर 21 मिनट से सप्तमी तिथि समाप्त- 30 अगस्त, रात 10 बजकर 46 मिनट तक पूजा का मुहूर्त- सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक

संतान सप्तमी 2025 पूजा विधि

  • संतान सप्तमी का व्रत रखने वाली माताओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनने चाहिए।
  • स्नान के बाद भगवान गणेश का ध्यान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा की तैयारी कर लें।
  • संतान सप्तमी में भगवान गणेश, देवी ललिता, माता पार्वती, देवी षष्ठी, कार्तिक, शिव जी और शालिग्राम की पूजा का महत्व है।
  • नारियल, चावल, हल्दी, चंदन, गुलाल, फूल, दूध, प्रसाद, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य आदि अर्पित कर पूजा करें।
  • संतान की मंगलकामना के लिए संतान सप्तमी की व्रत कथा पढ़ें और आरती के साथ पूजा का समापन करें।
  • पूजा स्थल के बाद मौली या कलावा भी रखें, जिसे पूजा के बाद दाहिने हाथ में पहन लें।
  • संतान सप्तमी का व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक रखा जाता है और अगले दिन सुबह व्रत खोला जाता है।

संतान सप्तमी व्रत महत्व

सनातन धर्म में संतान सप्तमी व्रत बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतान सप्तमी का व्रत करने से संतान के जीवन में खुशहाली का आगमन होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। खासकर माताएं इस व्रत को संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए रखती है।

कहा जाता है कि, विधि-विधान और श्रद्धाभाव से संतान सप्तमी का व्रत करने से माता को संतति सुख और संतान की आयु बढ़ाने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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