भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है।
समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे भगवान धन्वंतरि।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है।
यहां पढ़ें धन्वंतरि स्तोत्र के संस्कृत श्लोक और हिंदी अर्थ।
जानें धन्वंतरि स्तोत्र पढ़ने का आसान तरीका और धार्मिक महत्व।
Dhanvantari Stotram Religious Significance:हिंदू धर्म में भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे भगवान विष्णु के अवतार हैं और समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है।
इस अवसर पर भक्त उनके स्तोत्र का पाठ करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और शांति की कामना करते हैं। आइए जानते हैं धन्वंतरि स्तोत्र के संस्कृत श्लोक और उनका सरल हिंदी अर्थ।
धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ शुरू करने से पहले भगवान वासुदेव का स्मरण किया जाता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
श्लोक 1
नमामि धन्वन्तरिमादिदेवं
सुरासुरैर्वन्दितपादपद्मम्।
लोके जरारुग्भयमृत्युनाशं
दातारमीशं विविधौषधीनाम्॥1॥
श्लोक 2
पीताम्बरं चारुविलासदेहं
सशंखचक्रं पृथुदीर्घबाहुम्।
सौवर्णवर्णं सुविशालनेत्रं
ध्यायेत्सदा धन्वन्तरिं विचक्षणम्॥2॥
श्लोक 3 से 8
आत्रेयभास्करसुशीलमूर्तिं क्षीराम्बुधेर्मन्थनसम्भवं च।
अमृतकलशहस्तं सुन्दरं वरदानं वन्दे सदा धन्वन्तरिं जगत्प्रभुम्॥3॥
यो वैद्यराजो जगदेकवैद्यो यो रोगहर्ता भिषजां वरिष्ठः।
यस्यांशजाता विविधौषधानि तं धन्वन्तरिं प्राञ्जलिरासदामि॥4॥
क्षीरोदमन्थनसमुद्भवमच्युताय पीयूषपूर्णकलशं करयोर्दधानम्।
लक्ष्मीयुतं सुरगणैर्नुतमप्रमेयं श्रीधन्वन्तरिमहं शरणं प्रपद्ये॥5॥
चतुर्भुजं शंखसुदर्शनाभ्यां हस्ताभ्यां दधदमृतकुम्भयुक्तम्।
प्रणौमि नित्यं भिषजां पतिं तम्॥6॥
नमामि देवं सकलामयघ्नं चराचरस्य प्रभुमौषधानाम्।
महावराहादिनिजावतारं श्रीविष्णुरूपं भवभेषजं तम्॥7॥
सुधाकलशमादाय सर्वामयनिबर्हणम्।
सर्वलोकोपकाराय विष्णुर्धन्वन्तरिः स्मृतः॥8॥
इस स्तोत्र में भगवान धन्वंतरि की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। इसमें उन्हें देवताओं और असुरों द्वारा पूजनीय, औषधियों का दाता और संसार के कल्याणकारी स्वरूप के रूप में नमन किया गया है। उनके पीतांबर, शंख, चक्र और अमृत कलश धारण करने वाले स्वरूप का ध्यान किया जाता है। आगे के श्लोकों में उन्हें श्रेष्ठ वैद्य, आयुर्वेद से जुड़ा दिव्य स्वरूप और भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है।
धार्मिक मान्यता है कि धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करने से मन में सकारात्मकता, शांति और भक्ति का भाव बढ़ता है। भक्त भगवान धन्वंतरि से अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य तथा खुशहाल जीवन की प्रार्थना करते हैं। इस स्तोत्र का विशेष पाठ धनतेरस और धन्वंतरि जयंती के अवसर पर किया जाता है।
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर भगवान धन्वंतरि की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक स्तोत्र का पाठ करें। अंत में भगवान से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना करें। पाठ के लिए कोई कठिन नियम आवश्यक नहीं है। अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार इसका पाठ किया जा सकता है।