Ashadh Ravi Pradosh Vrat: आषाढ़ मास का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। इस बार यह व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान शिव की आराधना करने से महादेव के साथ सूर्यदेव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि यह शुभ संयोग आरोग्य, यश, सम्मान और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक करें, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करें तथा श्रद्धापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इस समय की गई आराधना शीघ्र फलदायी होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली का वास होता है। इस दिन जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करने के साथ सफेद वस्तुओं का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। दूध, चावल और चीनी से बनी खीर शिवजी को प्रिय मानी जाती है। मान्यता है कि इसका भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।
यदि चाहें तो मखाने की खीर का भोग भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद इस प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटना शुभ और पुण्यदायी माना गया है।
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प्रदोष व्रत की पूजा में महाभोग के साथ कुछ विशेष पूजन सामग्री भी अवश्य अर्पित करनी चाहिए। शिवलिंग का गंगाजल, कच्चे दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन प्रिय वस्तुओं से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान शिव का पंचामृत, जल एवं गंगाजल से अभिषेक करें।
भगवान शिव, माता पार्वती, श्रीगणेश और भगवान कार्तिकेय सहित पूरे शिव परिवार का पूजन करें। बेलपत्र, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
प्रदोष काल में भगवान शिव की आरती करें, शिव चालीसा का पाठ करें और शिव मंत्रों का जाप करें। पूजा पूर्ण होने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का पारण करें।