Pradosh Vrat: आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा? जानिए सही डेट और पूजा का शुभ समय

Pradosh Vrat Puja Muhurat: आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा, इसे लेकर यदि आपके मन में तिथि को लेकर भ्रम है, तो यहां जानिए सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत का महत्व।
Ashadha Pradosh Vrat Date
भगवान शिव (सौ.AI)
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Ashadha Pradosh Vrat Date: भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। सावन से पहले आने वाला आषाढ़ मास का यह प्रदोष व्रत भी शिव भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस बार तिथि को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है कि व्रत 11 जुलाई को रखा जाए या 12 जुलाई को। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार सही तिथि, प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व।

जानिए आषाढ़ का पहला रवि प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई 2026, रविवार को पड़ रही है। इसलिए इसी दिन रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ

12 जुलाई को सुबह 2:04 बजे होगा और इसका समापन रात 10:29 बजे होगा।

भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय कौन-सा है?

प्रदोष व्रत में सबसे अधिक महत्व प्रदोष काल में की जाने वाली शिव पूजा का माना गया है। इस दिन शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक का समय पूजा-अर्चना के लिए शुभ रहेगा। इस दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक करें, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।

क्यों इतना विशेष माना जाता है प्रदोष व्रत? जानिए धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करना तथा सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है।

प्रदोष व्रत के दिन भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी नियम

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत का संकल्प लें।

2. पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान शिव का पंचामृत, जल तथा गंगाजल से अभिषेक करें।

3. भगवान शिव, माता पार्वती, श्रीगणेश और कार्तिकेय सहित शिव परिवार का पूजन करें। बेलपत्र, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।

4. प्रदोष काल में भगवान शिव की आरती करें, शिव चालीसा और शिव मंत्रों का जाप करें। पूजा पूर्ण होने के बाद ही व्रत का पारण करें।

प्रदोष व्रत से जुड़ी मान्यता क्या कहती है?

धार्मिक मान्यता है कि, श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है। हालांकि, व्रत और पूजा-विधि से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन का पालन करना भी उचित माना जाता है।

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