Ramayan Spiritual India: रामायण और रामचरित मानस में भगवान राम को मुख्य नायक माना जाता है, लेकिन अगर इस कथा को अलग नजरिए से देखा जाए, तो कई ऐसे पात्र सामने आते हैं जिनका त्याग कम नहीं, बल्कि कई बार अधिक बड़ा नजर आता है। सवाल उठता है क्या त्याग सिर्फ राम और सीता तक सीमित था, या इसके पीछे और भी अनकही कहानियां छिपी हैं?
महान कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' ने अपने महाकाव्य में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के त्याग को केंद्र में रखा है। यह रचना 1921 में शुरू होकर 1934 में पूरी हुई और 1957 में प्रकाशित हुई। उर्मिला का जीवन उस त्याग की मिसाल है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जब लक्ष्मण 14 साल के वनवास के लिए राम के साथ गए, तब उर्मिला ने बिना किसी शिकायत के अकेले रहकर विरह सहा। उनका यह मौन समर्पण त्याग की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक द्वारा रचित कर्मवीर भरत खंडकाव्य में भरत के त्याग और कर्तव्यपरायणता को विस्तार से बताया गया है। जब उन्हें अयोध्या का राज मिला, तब उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया और राम की खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर खुद नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीने लगे। यह त्याग बताता है कि सत्ता से बड़ा उनके लिए धर्म और प्रेम था।
रामायण के कई पात्रों की चर्चा होती है, लेकिन भरत की पत्नी मांडवी का त्याग अक्सर अनदेखा रह जाता है। सोचिए, जब उनके पति को राज मिला, तब भी उन्होंने राजसी जीवन नहीं चुना। वे भरत के साथ नंदीग्राम में 14 वर्षों तक तपस्विनी बनकर रहीं। उनका यह संयम और समर्पण भी किसी बड़े त्याग से कम नहीं है।
अगर हम अवतारवाद को एक तरफ रखकर इन पात्रों को इंसान के रूप में देखें, तो कई बार भरत और उर्मिला जैसे पात्र राम और सीता से भी बड़े नायक-नायिका प्रतीत होते हैं। इन सभी के त्याग की अपनी-अपनी गहराई है, इसलिए किसी एक को सबसे बड़ा त्यागी कहना आसान नहीं है।
रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और कर्तव्य का महासागर है। हर पात्र ने अपने स्तर पर बड़ा त्याग किया है। इसलिए यह तय करना मुश्किल है कि सबसे बड़ा त्याग किसने किया क्योंकि हर त्याग अपने आप में अनमोल है।