Difference Between Cotton And Kalava Wick: हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाने की विशेष परंपरा हैं।आमतौर पर लोग पूजा-पाठ में रूई की बाती का इस्तेमाल करते है, लेकिन कई लोगों को देखा होगा है कि, भगवान की पूजा में कलावे यानी मौली की बाती का भी इस्तेमाल करते हैं। धर्म शास्त्रों में कलावे यानी मौली की बाती का भी विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन दोनों का इस्तेमाल करने का अलग-अलग कारण है।
इस बारे में 90 प्रतिशत लोग नहीं जानते हैं और पूजा के वक्त बिना सोचे-समझे जो सही लगता है उसका इस्तेमाल कर लेते हैं। आइए जानते हैं रूई और कलावे दोनों बाती में क्या अंतर है और इन्हें कब जलाना शुभ माना जाता है।
ज्योतिष एवं लोक मान्यता के अनुसार, रोजाना पूजा में रूई की बाती का दीपक जलाना शुभ होता है। रूई की बाती का इस्तेमाल सामान्य पूजा, आरती और दीपक जलाने के लिए किया जाता है। इसे सुबह और शाम पूजा के समय जला सकते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता और शांति आती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ,रोजाना रूई की बाती का दीपक जलाने से घर में शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। इसके अलावा,मन को शांति मिलता है और पूजा के दौरान एकाग्रता बढ़ती है।
रूई की गोल बाती को स्थिरता और शांति से जोड़ा जाता है, जबकि लंबी बाती का इस्तेमाल विशेष पूजा पर किया जाता है।
हिंदू धर्म में कलावा यानी मौली को पवित्र धागा माना जाता है। जो कि लाल और पीले रंग का यह पवित्र धागा पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होता है। इसी कलावे से बनाई गई बाती को कुछ विशेष धार्मिक अवसरों पर दीपक में इस्तेमाल किया जाता है।
आमतौर पर कई लोग घरों में सुबह-शाम की पूजा में कलावे की बाती जला लेते हैं और उन्हें यह पता भी नहीं होता है कि इसका इस्तेमाल कब और कहां करना चाहिए। जबकि कलावे की बाती का दीपक किसी विशेष पूजा, मनोकामना या संकट के समय जलाया जाता है। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा के दौरान भी इसे जलाना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावे की बाती जलाने से सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर शुक्रवार या दीपावली के दिन माता लक्ष्मी के सामने कलावे की बाती का दीपक जरूर जलाए।
बताया जाता है कि, शुक्रवार या दीपावली के अलावा, मंगलवार या शनिवार को हनुमान जी के सामने भी कलावे की बाती जला सकते है। कहते है इससे भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। धर्म शास्त्रों में लाल रंग को मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है। इसलिए कलावे की लाल बाती का दीपक जलाने को मंगल से जुड़ी परेशानियों में कमी आती है। राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए भी लाल बाती का दीपक जलाया जा सकता है।