Pradosh Vrat Shivling Abhishek Method: प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का अत्यंत शुभ और प्रभावशाली दिन बताया गया है। विशेष रूप से प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत ही पुण्यदायी होता है। धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन विधि-विधान से पूजा और अभिषेक करने पर भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसलिए यदि आप अपनी किसी इच्छा की पूर्ति चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग का श्रद्धा से अभिषेक अवश्य करें।
प्रदोष व्रत 2026 तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को रात 12 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा।
पंचांग को देखते हुए 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल का समय शाम को 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजे तक है।
कैसे करें प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक? Pradosh Vrat Shivling Abhishek Method
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और शाम के समय शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें।
- सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल और गंगाजल से स्नान कराएं।
- अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें।
- अगर शत्रुओं से परेशान हैं या कर्ज बढ़ा हुआ है, तो गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
- भगवान शिव को भस्म, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें।
- शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करे।
- साथ ही बेलपत्र कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
- प्रदोष काल में शिवलिंग के पास गाय के घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद 'शिव चालीसा' या 'रुद्राष्टकम' का पाठ करें।
- अंत में भक्ति भाव के साथ आरती करें।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
- केतकी के फूल - भगवान शिव ने केतकी के फूल को श्राप दिया था। इसलिए शिवलिंग पर केतकी का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
- टूटे हुए चावल - पूजा में हमेशा साबुत चावल का ही इस्तेमाल करें। टूटे हुए चावल अपूर्णता का प्रतीक होते हैं, इसलिए उन्हें भगवान को नहीं चढ़ाने चाहिए।