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फरवरी में किस दिन है प्रदोष? जानिए प्रदोष व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat Significance: फरवरी 2026 में प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा? जानिए त्रयोदशी तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और भगवान शिव की कृपा पाने के आसान उपाय।

सीमा कुमारी

Pradosh Vrat Kab Hai: शिवजी को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन शाम के समय पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। हर महीने दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है, जिसे भक्त पूरे नियम और भक्ति के साथ करते है। इस बार फरवरी महीने का प्रदोष व्रत 14 को रखा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं अनुसार, इस व्रत को रखने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही शनि के दोषों से भी छुटकारा मिल जाता है। इतना ही नहीं शनि प्रदोष व्रत कालसर्प दोष और पितृ दोष आदि के निवारण हेतु भी उत्तम माना जाता है। जानिए फरवरी में प्रदोष व्रत किस तारीख को पड़ रहा है और पूजा का मुहूर्त क्या रहेगा।

फरवरी में प्रदोष व्रत कब है 2026

फरवरी में प्रदोष व्रत 14 तारीख को रखा जाएगा और ये शनि प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी की शाम 04:01 बजे से शुरू होकर 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे तक रहेगी।

शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2026

शनि प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 14 फरवरी 2026 की शाम 06:10 से रात 08:44 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा बेहद फलदायी साबित होगी।

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र पहनें।
  • भगवान शिव की बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि से विधि विधान पूजा करें।
  • दिन भर उपवास रहें और शाम की पूजा से पहले फिर से स्नान करें।
  • शाम में भगवान शिव की विधि विधान पूजा करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें।
  • कथा सुनने के बाद भगवान को भोग लगाएं और आरती उतारें।
  • पूजा के बाद आप सात्विक भोजन कर सकते हैं।
  • कुछ लोग ये व्रत फलाहार करके रखते हैं तो कुछ एक समय भोजन करके ये व्रत करते हैं।
  • आपकी जैसी इच्छा हो वैसे ये व्रत रखें।

  प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे प्रभावशाली व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले का समय 'प्रदोष काल' कहलाता है। मान्यता है कि इस समय महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं।

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