पितृ पक्ष  (सौ.सोशल मीडिया)
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Pitru Paksha 2026: महाभरणी से सर्वपितृ अमावस्या तक ये 3 दिन क्यों हैं खास? जानें किसका कब करें श्राद्ध

Pitru Paksha Shradh Dates: वैसे तो पितृ पक्ष की सभी तिथियां बहुत ही खास है, लेकिन धर्म शास्त्रों में श्राद्ध की 3 विशेष तिथियां भी बेहद शुभ एवं फलदायी मानी गई है। जानें ये तीन दिन क्यों खास है।

सीमा कुमारी

Pitru Paksha 3 Important Days: 27 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष शुरु गयी है। सनातन धर्म में यह समय पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ख़ास समय माना जाता है। हमारे जीवन में पूर्वजों यानी पितरों का स्थान अत्यंत पूजनीय माना गया है। वैसे तो पितृ पक्ष की सभी तिथियां बहुत ही खास है, लेकिन धर्म शास्त्रों में श्राद्ध की 3 विशेष तिथियां भी बेहद शुभ एवं फलदायी मानी गई है।

इन तिथियों का धार्मिक महत्व भी माना गया है। यदि किसी पूर्वज के निधन की तिथि याद न हो या असमय मृत्यु हुई हो, तो इन 3 महातिथियों पर किया गया श्राद्ध-तर्पण सीधे पितरों को तृप्त करता है और कुल में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। तो आइए जानते हैं उन तिथियों के बारे में.

पितृ पक्ष की ये 3 तिथियां हैं सबसे खास

महाभरणी श्राद्ध

महाभरणी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान मनाया जाने वाला एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण श्राद्ध है, जो 2026 में 29 सितंबर, मंगलवार को है। इसका संबंध भरणी नक्षत्र से है, इसलिए इसे भरणी श्राद्ध या महाभरणी श्राद्ध कहा जाता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, परिवार में किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हुई हो या वह अविवाहित रहा हो, तो उसके लिए भरणी श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। कई परिवारों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के एक वर्ष पूरे होने के बाद भी इस श्राद्ध को करने की परंपरा है।

मातृ नवमी

मातृ नवमी की यह तिथि दिवंगत महिला पूर्वजों को समर्पित मानी जाती है। इसी वजह से इसे मातृ नवमी या मातृ श्राद्ध कहा जाता है। इस साल 2026 में मातृ नवमी 4 अक्टूबर, रविवार को पड़ेगी।

इस दिन परिवार की दिवंगत मां, दादी, नानी या अन्य महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। अगर किसी महिला पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि मालूम न हो, तो भी कई धार्मिक परंपराओं में मातृ नवमी के दिन उनके नाम से श्राद्ध और तर्पण करने की मान्यता है।

सर्वपितृ अमावस्या

'सर्वपितृ अमावस्या' पितृ पक्ष का अंतिम दिन कहलाता है, जिसे 'महालय अमावस्या' के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को पड़ेगी। बताया जाता है कि यह पितृ पक्ष का सबसे प्रमुख दिन है।

यदि आपको अपने किसी पूर्वज के निधन की सटीक तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश आप उनकी निर्धारित तिथि पर श्राद्ध करने से चूक गए हों, तो इस दिन सभी पितरों का एक साथ तर्पण और पिंडदान किया जा सकता है। इस दिन किए गए दान से सभी पूर्वज प्रसन्न होकर अपने लोक लौटते है।

क्या इन तीन दिनों में ही श्राद्ध करना जरूरी है?

इन तीन दिनों में ही श्राद्ध करना जरूरी है नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जिस तिथि पर व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष की उसी तिथि पर उनका तर्पण करना ही प्रमुख नियम माना जाता है।

उदाहरण के तौर अगर किसी पूर्वज का निधन द्वितीया तिथि को हुआ था, तो पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है महाभरणी, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या को विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि इनसे कुछ खास परिस्थितियां और परंपराएं जुड़ी हुई है।

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