बेटियां भी कर सकती है श्राद्ध   (सौ.सोशल मीडिया)
धर्म

Pitru Paksha 2026: माता-पिता के श्राद्ध का संकल्प क्या बेटी भी ले सकती है? जानें परंपरा में क्या है व्यवस्था

Mata Pita Ka Shradh: पितृ पक्ष में माता-पिता का श्राद्ध क्या बेटी भी कर सकती है? जानें अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में बेटी के श्राद्ध करने और संकल्प लेने को लेकर क्या मान्यता है।

सीमा कुमारी

Beti Shradh Kar Sakti Hai : पितृ पक्ष आते ही एक सवाल बहुत से परिवारों में उठता है कि माता-पिता का श्राद्ध क्या केवल बेटा ही कर सकता है या बेटी भी यह जिम्मेदारी निभा सकती है? खासकर उस परिवार में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां माता-पिता की केवल बेटियां हैं या पुत्र किसी कारण से श्राद्ध करने की स्थिति में नहीं है। धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध के कर्ता को लेकर अलग-अलग मत और व्यवस्थाएं मिलती हैं। इसलिए बेटी के श्राद्ध करने के सवाल को भी इन्हीं अलग-अलग परंपराओं के संदर्भ में समझना जरूरी है।

क्या बेटी माता-पिता का श्राद्ध कर सकती है?

परंपरागत व्यवस्था में पुत्र को माता-पिता के श्राद्ध का प्रमुख कर्ता माना गया है। हालांकि बेटी के श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करने को लेकर सभी धार्मिक व्याख्याएं एक जैसी नहीं हैं। कुछ परंपराएं पुत्र की अनुपस्थिति में पत्नी, पौत्र, नाती या दूसरे संबंधियों को प्राथमिकता देती हैं, जबकि कई धार्मिक व्याख्याओं और वर्तमान प्रचलन में विशेष परिस्थिति में बेटी द्वारा भी पितृ कर्म किए जाने को स्वीकार किया जाता है।

केवल बेटियां हों तो क्या करें?

अगर परिवार में पुत्र नहीं है और बेटी अपने माता-पिता के लिए श्राद्ध करना चाहती है, तो परिवार की कुल परंपरा को जानना सबसे व्यावहारिक तरीका माना जा सकता है। श्राद्ध की विधि हर क्षेत्र और समुदाय में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। ऐसे में बेटी परिवार के पुरोहित या किसी जानकार आचार्य से अपनी परिस्थिति बताकर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि समझ सकती है।

नाती भी कर सकता है पितृ कर्म?

पारंपरिक धार्मिक व्याख्याओं में बेटी के पुत्र यानी नाती को भी नाना-नानी के श्राद्ध से जोड़ा गया है। यही कारण है कि पुत्र न होने की स्थिति में श्राद्ध कौन करे, इसका उत्तर केवल एक रिश्ते तक सीमित नहीं रहता। परिवार में उपलब्ध संबंधियों और चली आ रही परंपरा के अनुसार इसकी व्यवस्था की जाती रही है।

सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और स्मरण

‘श्राद्ध’ का संबंध श्रद्धा से माना जाता है। इसका मूल भाव दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों को याद करना, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके निमित्त धार्मिक कर्म करना है। इसलिए केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि पूरे हिंदू समाज में बेटी के लिए एक ही सार्वभौमिक नियम प्रचलित है।

यदि बेटी माता-पिता का श्राद्ध करना चाहती है, तो अपने परिवार की परंपरा और मान्य विधि को समझकर आगे बढ़ना बेहतर है। खासकर विधिवत पिंडदान या तर्पण करना हो तो स्थानीय परंपरा जानने वाले पुरोहित से विधि समझ लेने से धार्मिक मतभेदों को लेकर होने वाला भ्रम भी दूर हो सकता है

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