पितृ पक्ष (फोटो.सोशल मीडिया)  
धर्म

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में पड़ गया है जन्मदिन, मनाएं या नहीं? जानिए शास्त्र के नियम

Pitru Paksha: पितृपक्ष शोक मनाने का समय होता है। ऐसे में यदि परिवार में किसी का जन्मदिन पड़ जाए, तो क्या उसे मनाना चाहिए। क्या है शास्त्र और धार्मिक मान्यता में जन्मदिन मनाने के नियम।

रीता राय सागर

Pitru Paksha Religious Beliefs: पितृपक्ष का समय अपने पितरों को याद करने, उनके लिए पिंड दान करने, पूजा-पाठ करने का समय होता है। इससे पितरों का आशीर्वाद सदैव पूरे परिवार पर बना रहता है।

ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि पितृ पक्ष के दौरान यदि परिवार में किसी का जन्मदिन हो, तो क्या उसे सेलिब्रेट किया जाना चाहिए या नहीं। कुछ लोगों का मानना है कि जन्मदिन मनाने में कोई बुराई नहीं है, जब कि कई लोगों का मानना है कि जन्मदिन सेलिब्रेट नहीं किया जाना चाहिए।

पितृपक्ष कोई अशुभ समय नहीं

ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि पितृपक्ष को केवल शोक या अशुभ समय मानना उचित नहीं है। सनातन परंपरा में पितृपक्ष का समय पूर्वजों को याद करने, तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का होता है। इस माध्यम से हम उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, ऐसे में इसे नाकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या पितृपक्ष में जन्मदिन मना सकते हैं?

शास्त्र में ऐसा कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है कि पितृपक्ष में जन्मदिन मनाना वर्जित है। हालांकि विद्वान मानते हैं कि यदि इस दौरान आपका जन्मदिन पड़ता है, तो उसे सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया जा सकता है। हालांकि भव्य पार्टी, तेज संगीत, बड़े उत्सव या अनावश्यक दिखावे से बचना बेहतर होगा।

जन्मदिन कैसे मनाना माना जाता है शुभ?

अगर जन्मदिन पितृपक्ष में आए तो इस दिन धूमधाम से मनाने की बजाय कुछ पुण्य कार्य करना अधिक शुभ हो सकता है।

  • मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लें।
  • पितरों के नाम से तर्पण या श्राद्ध कर्म में सहभागी बनें।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
  • पौधारोपण करें और उसकी देखभाल का संकल्प लें।
  • गौ सेवा या पक्षियों को दाना-पानी दें।

ऐसे धार्मिक कार्य जन्मदिन को और अधिक सार्थक बनाते हैं। इसके साथ ही पितरों की कृपा दृष्टि भी परिवार पर बनी रहती है।

पितृपक्ष में इन कार्यों को करने से बचें

पितृपक्ष के दौरान कोई भी मंगल कार्य नहीं किए जाते हैं, जैसे- परंपरागत रूप से विवाह, गृह प्रवेश, बड़े मांगलिक आयोजन, नए व्यवसाय की शुरुआत या अत्यधिक उत्सव। इसका उद्देश्य इस समय विशेष में पितरों को याद करने और उनसे जुड़े अनुष्ठान पर ध्यान केंद्रित करने में लगाना चाहिए।

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