धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है।
इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है।
धनतेरस की शाम घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाने की परंपरा है।
पूजा घर, तुलसी के पौधे और रसोई में भी दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर यम दीपदान करने की धार्मिक परंपरा निभाई जाती है।
Dhanteras Diya Jalane Ke Niyam: आज यानी 6 नवंबर, शुक्रवार को देशभर में धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है। दिवाली से पहले आने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में खास महत्व है। धनतेरस को धन, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाना शुभ होता है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। आइए जानते हैं धनतेरस पर किन 5 जगहों पर दीपक जलाना चाहिए और क्या है इनका धार्मिक महत्व।
धनतेरस की शाम घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। हिंदू मान्यताओं में मुख्य द्वार को घर में सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शाम के समय दरवाजे के दोनों ओर दीपक रखे जाते हैं। इससे घर का प्रवेश द्वार रोशनी से जगमगा उठता है।
धनतेरस पर पूजा स्थल में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना की जाती है। इस दौरान घी या तेल का दीपक जलाकर देवी-देवताओं का स्मरण करें। मान्यता है कि पूजा घर में दीपक जलाने से सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है।
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना गया है। धनतेरस की शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि तुलसी के पास दीप जलाने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। दीपक रखते समय पौधे की पत्तियों और आसपास की जगह का ध्यान रखें।
रसोई घर को अन्न और पोषण का प्रमुख स्थान माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर रसोई में भी दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिलता है और घर में अन्न-धन की बरकत बनी रहती है।
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यमराज के प्रति सम्मान और परिवार की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। इस परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
धनतेरस पर दीपक जलाना केवल पूजा की एक रस्म नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक भी है। इस दिन घर को दीपों से सजाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। साथ ही भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और कुबेर देव से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।