Importance Of Om In Yoga : आज, 21 जून 2026 को पूरे विश्व में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग' रखी गई है, जो लोगों को स्वस्थ, संतुलित और सुखी जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दिन केवल योगाभ्यास को बढ़ावा देने का अवसर नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं को समझने का भी मौका देता है। योग की शुरुआत या समापन के समय अक्सर ॐ का उच्चारण किया जाता है। आपने भी कई बार लोगों को योग करते हुए एकसाथ ॐ का जाप करते देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि योग के दौरान ॐ का उच्चारण इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? क्योंकि इसके पीछे केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा है-
सनातन धर्म में ॐ को सबसे पवित्र और शक्तिशाली ध्वनि माना गया है। इसे प्रणव मंत्र भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ॐ तीन अक्षरों अ, उ और म से मिलकर बना है।
शास्त्रों के अनुसार, ये तीनों अक्षर सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, पालनकर्ता भगवान विष्णु और संहारकर्ता भगवान शिव का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए ॐ को संपूर्ण सृष्टि और ब्रह्मांड की मूल ध्वनि कहा जाता है।
योग गुरु के अनुसार, योग का उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ बनाना नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना भी है। ऐसा माना जाता है कि ॐ का उच्चारण व्यक्ति के मन को शांत करता है और उसे ध्यान में केंद्रित होने में मदद करता है।
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बताया जाता है कि, जब कोई व्यक्ति योग शुरू करने से पहले ॐ का जाप करता है, तो उसका मन बाहरी चिंताओं से हटकर भीतर की ओर केंद्रित होने लगता है। इससे योगाभ्यास अधिक प्रभावी माना जाता है। इसलिए योग के दौरान ॐ का जाप करना अनिवार्य बताया गया है।
हिंदू धर्मग्रंथों में ॐ को ब्रह्मांड की पहली ध्वनि भी बताया गया है। मान्यता है कि सृष्टि की उत्पत्ति के समय सबसे पहले यही ध्वनि प्रकट हुई थी। वेदों, उपनिषदों और भगवद्गीता में भी ॐ के महत्व का वर्णन मिलता है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि ॐ का जाप करने से व्यक्ति का मन ईश्वर के प्रति समर्पित होता है और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।