भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (सौ.जैमिनी)
Biggest Ekadashi Of The Year: आज 25 जून गुरुवार को निर्जला एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा हैं। हिंदू धर्म की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और फलदायी बताया गया है। बिना खाए -पीए किए किए जाने वाले इस व्रत-तप से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत रखने से सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता हैं।
जैसा कि महाभारत में भीम ने किया था। इस दिन बिना जल के उपवास रखा जाता है और श्री हरि विष्णु की विशेष पूजा होती है। व्रत के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, जिसमें दान-पुण्य और तामसिक भोजन से परहेज शामिल है।
निर्जला एकादशी के दिन क्या करें?
- इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, चंदन और पंचामृत अर्पित करने का विशेष महत्व होता है।
- इस एकादशी पर श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि तक जल ग्रहण किए बिना उपवास रखें तो अच्छा होगा। इस दिन केवल भोजन ही नहीं, बल्कि विचार, वाणी और व्यवहार की शुद्धता भी आवश्यक मानी जाती है।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ बहुत शुभ फल देने वाला माना गया है। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- इस दिन जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, वस्त्र, फल और शर्बत का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। गर्मी के समय प्यासे लोगों को पानी पिलाना भी बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है।
- निर्जला एकादशी की रात में भजन, कीर्तन, कथा श्रवण और भगवान विष्णु का स्मरण करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
निर्जला एकादशी पर क्या न करें?
- एकादशी के दिन मांसाहार, शराब, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह मना किया गया जो लोग व्रत नहीं रखते, उन्हें भी सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
- तुलसी के पत्तों को एकादशी के दिन तोड़ना शुभ नहीं माना जाता है। यदि पूजा के लिए आवश्यकता हो, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए।
- इस दिन क्रोध, झूठ बोलना, चुगली करना और विवाद करना व्रत के पुण्य को कम कर देता है, इसलिए शांत और सकारात्मक आचरण रखना चाहिए ।
- धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का दिन भक्ति, साधना और आत्मचिंतन के लिए होता है, इसलिए इस दिन अधिक समय सोने या व्यर्थ कार्यों में नहीं बिताना चाहिए।