Maa Durga Ke Swagat Ki Taiyari: शारदीय नवरात्रि में घर-घर मां दुर्गा की पूजा की जाती है। कलश स्थापना होती है और कई परिवार नौ दिनों तक व्रत और विशेष पूजा करते हैं। ऐसे में नवरात्रि शुरू होने से पहले घर और पूजा स्थान की सफाई की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। लेकिन सफाई का मतलब केवल धूल हटाना नहीं है।
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में कुछ ऐसी चीजों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें टूटी, खराब या अनुपयोगी अवस्था में घर में रखना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे में नवरात्रि की तैयारी करते समय पूरे घर के साथ पूजा स्थान पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
नवरात्रि से पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई कर सकते हैं। अगर वहां बहुत पुराने फूल, खराब हो चुकी पूजा सामग्री या दूसरी अनुपयोगी चीजें जमा हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक अलग किया जा सकता है।
देवी-देवताओं की कोई प्रतिमा खंडित हो गई हो या तस्वीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हो तो धार्मिक परंपरा के अनुसार उसे पूजा स्थान पर रखने से बचने की मान्यता है। ऐसी धार्मिक वस्तुओं के उचित निस्तारण के लिए स्थानीय परंपरा का पालन करना बेहतर है।
घर में टूटा कांच, खराब बर्तन, बंद घड़ी या लंबे समय से खराब पड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान अक्सर यूं ही जमा रहता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में टूटे और अनुपयोगी सामान को घर में रखना अच्छा नहीं माना जाता। नवरात्रि की सफाई ऐसे सामान को छांटने का अच्छा अवसर हो सकती है। जो चीज ठीक हो सकती है उसे ठीक कराएं और जो बिल्कुल बेकार हो चुकी है उसका सुरक्षित तरीके से निस्तारण करें।
बालकनी या घर के अंदर रखे पौधों में कोई पौधा पूरी तरह सूख चुका है तो उसकी जगह नया पौधा लगाया जा सकता है। इसी तरह पुराने डिब्बे, बेकार पैकेट, लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाला सामान और अनावश्यक कबाड़ हटाकर घर को व्यवस्थित किया जा सकता है। वास्तु मान्यताओं में स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान को सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है।
नवरात्रि में मां दुर्गा के स्वागत की भावना के कारण मुख्य द्वार को साफ और व्यवस्थित रखने की भी परंपरा है। प्रवेश द्वार के आसपास बिखरे जूते-चप्पल या बेकार सामान हो तो उन्हें सही जगह रखा जा सकता है। पूजा स्थान के आसपास भी अनावश्यक सामान जमा न रहने दें।
नवरात्रि की तैयारी का मूल भाव केवल यह नहीं कि घर से कुछ चीजें बाहर निकाल दी जाएं। स्वच्छता, व्यवस्था और पूजा के अनुकूल वातावरण बनाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। ध्यान रहे कि ऊपर बताई गई बातें मुख्य रूप से धार्मिक और वास्तु परंपराओं से जुड़ी मान्यताएं हैं, इन्हें वैज्ञानिक नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।