Ravan and Ram Doing Havan (Source. AI) 
धर्म

युद्ध से पहले रावण के चरणों में क्यों गए थे श्री राम? जानिए आस्था, विद्वता और तथास्तु की अनसुनी कथा

Ramayan का युद्ध सिर्फ शस्त्रों का नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और ज्ञान का संग्राम भी था। बहुत कम लोग जानते हैं कि लंका पर चढ़ाई से पहले प्रभु श्री राम ने अपने सबसे बड़े शत्रु रावण से पूजा करवाई थी।

सिमरन सिंह

Ravana Ne Ki Ram Ke Liye Puja: रामायण का युद्ध सिर्फ शस्त्रों का नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और ज्ञान का संग्राम भी था। बहुत कम लोग जानते हैं कि लंका पर चढ़ाई से पहले प्रभु श्री राम ने अपने सबसे बड़े शत्रु रावण से पूजा करवाई थी और उससे आशीर्वाद भी मांगा था। यह प्रसंग न सिर्फ श्री राम की मर्यादा को दर्शाता है, बल्कि रावण की विद्वता और शिव भक्ति को भी उजागर करता है।

लंका विजय से पहले शिव आशीर्वाद की आवश्यकता

जब प्रभु श्री राम लंका विजय की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें यह भली-भांति ज्ञात था कि इतने बड़े युद्ध से पहले भगवान शिव का आशीर्वाद अनिवार्य है। शिव कृपा के बिना विजय संभव नहीं मानी जाती थी। इसी कारण श्री राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर शिव पूजन का संकल्प लिया। यह पूजा साधारण नहीं, बल्कि विधि-विधान से संपन्न होने वाला यज्ञ था।

यज्ञ के लिए चाहिए था अद्भुत विद्वान

इस विशेष यज्ञ को कराने के लिए ऐसे विद्वान पंडित की आवश्यकता थी, जिसे शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं का गहरा ज्ञान हो। कई ऋषि-मुनियों के होते हुए भी प्रभु श्री राम की दृष्टि में उस समय रावण से बड़ा कोई विद्वान नहीं था। रावण वेदों, शास्त्रों और शिव उपासना का प्रकांड ज्ञाता था।

शत्रु को दिया गया यज्ञ का निमंत्रण

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने धर्म का मार्ग अपनाते हुए रावण को यज्ञ के लिए आमंत्रित किया। रावण स्वयं भगवान शिव का परम भक्त था, इसलिए वह इस निमंत्रण को ठुकरा नहीं सका। कहा जाता है कि रावण रामेश्वरम पहुंचा और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करवाई, जिससे यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

तथास्तु का वरदान और धर्म की विजय

यज्ञ पूर्ण होने के बाद प्रभु श्री राम ने रावण से युद्ध में विजय का आशीर्वाद मांगा। यह क्षण अत्यंत विलक्षण था जहां शत्रु शत्रु से नहीं, बल्कि विद्वान विद्वान से बात कर रहा था। रावण ने भी धर्म का पालन करते हुए श्री राम की प्रार्थना स्वीकार की और 'तथास्तु' कहकर उन्हें आशीर्वाद दिया। यह घटना बताती है कि रावण चाहे अधर्म के मार्ग पर था, लेकिन ज्ञान और शिव भक्ति में वह अद्वितीय था।

कथा का गूढ़ संदेश

यह प्रसंग सिखाता है कि धर्म, ज्ञान और मर्यादा युद्ध से भी ऊपर होते हैं। श्री राम ने शत्रु से भी ज्ञान लेने में संकोच नहीं किया और रावण ने भी यज्ञ के समय अपने अहंकार को त्याग दिया।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और धार्मिक कथाओं पर आधारित है।

UP Chunav: AIMIM से हाथ मिलाइए, बाबा को नहीं बनने देंगे मुख्यमंत्री; ओवैसी का सपा-कांग्रेस को ऑफर

युवराज से उम्मीद छोड़ दे देश...राहुल गांधी पर बरसे CM योगी, हामिद अंसारी के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

चंद्रशेखरन की ताजपोशी पर छिड़ी रार, Tata Trust ने खारिज किया बोर्ड का फैसला

रची जा रही साजिश...हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता वाले बयान पर भड़के मौलाना, लगाए गंभीर आरोप

दिया जलाने के लिए पैसा, हॉस्टल के लिए क्यों नहीं? राहुल गांधी का PM मोदी से सीधा सवाल