मुंबई के लालबागचा राजा गणेशोत्सव सोर्स- सोशल मीडिया
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Lalbaugcha Raja 2026: शुरू हुआ लालबागचा राजा का 93वां गणेशोत्सव, जानें बप्पा के दरबार से जुड़ी पूरी जानकारी

Lalbaugcha Raja Special: लालबागचा राजा का 93वां गणेशोत्सव 14 से 25 सितंबर 2026 तक चलेगा। मुंबई के इस प्रसिद्ध पंडाल में दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन होगा।

अंकिता पटेल

Why Lalbaugcha Raja Is Famous: देशभर में गणेश चतुर्थी का उत्सव शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र में इस पर्व का उत्साह सबसे अलग नजर आता है। मुंबई की गलियों से लेकर बड़े-बड़े गणपति पंडालों तक हर जगह 'गणपति बप्पा मोरया' की गूंज सुनाई दे रही है। इसी बीच मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणपति पंडालों में शामिल लालबागचा राजा एक बार फिर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है।

इस साल लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल अपना 93वां गणेशोत्सव मना रहा है। लालबागचा राजा का उत्सव इस वर्ष 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 तक चलेगा। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बप्पा की भव्य विसर्जन यात्रा के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। हर साल की तरह इस बार भी देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुंबई पहुंचे है।

11 सितंबर को सामने आई बप्पा की पहली झलक

मुंबई के लालबागचा राजा पहली झलक

गणेश चतुर्थी से कुछ दिन पहले ही भक्तों को लालबागचा राजा के प्रथम दर्शन का इंतजार रहता है। इस वर्ष 11 सितंबर 2026 को शाम 7 बजे लालबाग मार्केट में बप्पा की पहली झलक भक्तों के सामने लाई गई। प्रथम दर्शन के बाद लालबागचा राजा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आने लगे।

लालबागचा राजा की पहली झलक देखने के लिए हर साल आम श्रद्धालुओं के साथ फिल्म जगत, राजनीति और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भी पहुंचते हैं। बप्पा के दर्शन को लेकर मुंबई में गणेश चतुर्थी से पहले ही उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।

इस बार मंदिर की थीम ने खींचा ध्यान

लालबागचा राजा मंदिर की थीम

लालबागचा राजा का पंडाल हर साल अपनी भव्य सजावट और अलग थीम के लिए चर्चा में रहता है। 2026 में भी पंडाल को खास धार्मिक स्वरूप दिया गया है। इस बार प्रवेश द्वार की सजावट दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर से प्रेरित बताई जा रही है। भव्य प्रवेश द्वार के साथ पंडाल की सजावट में बारीक कलाकारी और धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है।

दरबार में चांदी की सजावट भी खास आकर्षण बनी हुई है। पंडाल के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक विषयों को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि बप्पा की प्रतिमा के साथ-साथ पंडाल की सजावट भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

मुख दर्शन और चरण स्पर्श दर्शन

लालबागचा राजा

लालबागचा राजा के दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। यहां मुख्य रूप से मुख दर्शन और चरण स्पर्श दर्शन की व्यवस्था भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है।

मुख दर्शन में श्रद्धालु दूर से भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा के दर्शन करते हैं। वहीं चरण स्पर्श दर्शन में भक्तों को बप्पा के चरणों के करीब जाकर आशीर्वाद लेने का अवसर मिलता है। दोनों तरह के दर्शन के लिए अलग-अलग कतार और प्रवेश व्यवस्था हो सकती है।

गणेशोत्सव के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और भारी भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

क्या लालबागचा राजा के दर्शन के लिए टिकट लेना होगा?

लालबागचा राजा के दर्शन टिकट

लालबागचा राजा के दर्शन को लेकर हर साल सोशल मीडिया पर टिकट और वीआईपी पास से जुड़ी कई तरह की जानकारी वायरल होती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट के माध्यम से पास खरीदने से बचना चाहिए।

2026 में किसी भी भुगतान वाले विशेष दर्शन या वीआईपी पास की कीमत को आधिकारिक घोषणा के बिना निश्चित मानना सही नहीं होगा। श्रद्धालुओं को दर्शन और प्रवेश से संबंधित जानकारी के लिए केवल लालबागचा राजा मंडल के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करना चाहिए।

लालबागचा राजा दर्शन शेड्यूल 2026

लालबागचा राजा दर्शन शेड्यूल 2026
  • सामान्य दर्शन: सुबह करीब 5 बजे से

  • मुख दर्शन: करीब सुबह 6 बजे से

  • चरण स्पर्श/नवसाची दर्शन: करीब सुबह 6 बजे से

  • दर्शन व्यवस्था दिन-रात जारी रहने की जानकारी दी गई है।

  • भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के अनुसार कतारों के प्रवेश समय में बदलाव किया जा सकता है।

1934 से जारी है लालबागचा राजा की परंपरा

लालबागचा राजा का इतिहास

लालबागचा राजा का इतिहास काफी पुराना है। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। पिछले कई दशकों से यह गणपति मुंबई के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। लालबागचा राजा की लोकप्रियता केवल मुंबई या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां बप्पा के दर्शन के लिए आते हैं। समय के साथ लालबागचा राजा मुंबई के सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक गणपति उत्सवों में शामिल हो गया है।

सिर्फ गणेशोत्सव नहीं, सामाजिक सेवा में भी योगदान

लालबागचा राजा मंडल

लालबागचा राजा मंडल की पहचान केवल भव्य गणपति उत्सव तक सीमित नहीं है। मंडल लंबे समय से सामाजिक और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों में भी योगदान देता रहा है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सहायता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मंडल जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास करता है। यही वजह है कि लालबागचा राजा को केवल एक गणपति पंडाल के तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों से जुड़े संस्थान के रूप में भी देखा जाता है।

प्रसाद के कचरे से ऊर्जा बनाने की पहल

प्रसाद के कचरे से ऊर्जा बनाने की पहल

2026 में लालबागचा राजा उत्सव से जुड़ी एक खास पहल भी चर्चा में है। बप्पा को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद और अन्य जैविक कचरे का इस्तेमाल ऊर्जा तैयार करने के लिए करने की योजना पर काम किया जा रहा है। जैविक कचरे को जैव-मीथेनेशन जैसी तकनीक के माध्यम से ऊर्जा में बदलने का उद्देश्य कचरे को कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। यह पहल गणेशोत्सव को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

क्यों खास है लालबागचा राजा?

क्यों खास है लालबागचा राजा?

लालबागचा राजा की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्यता से ज्यादा लोगों की आस्था है। मुंबई के लालबाग इलाके में स्थापित यह गणपति वर्षों से लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर बप्पा के दरबार में पहुंचते हैं। कुछ लोग हर साल यहां दर्शन करने आते हैं, जबकि कई परिवारों के लिए लालबागचा राजा के दर्शन गणेशोत्सव की पुरानी परंपरा का हिस्सा बन चुके हैं। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी आते ही मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। इस बार भी 14 सितंबर से शुरू गणेशोत्सव में बप्पा के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है।

25 सितंबर को होगी बप्पा की विदाई

25 सितंबर को होगी बप्पा की विदाई

गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव के बाद 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा निकलेगी। इस दौरान मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा को विदाई देने के लिए जुटेंगे। गणपति विसर्जन के दौरान 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारों से मुंबई का माहौल भक्तिमय हो जाएगा। लालबागचा राजा की विसर्जन यात्रा मुंबई के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक मानी जाती है।

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