देशभर में नाग पंचमी का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा जो हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आती है। इस दिन शिवभक्त नाग देवता की विधि-विधान के साथ पूजा करते है और दीवारों पर देवता नागों की आकृति उकेरते है। कहा जाता है इस दिन नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। क्या आपने इस दिन गुड़िया पीटने के मान्यता के बारे में सुना है कई जगहों पर गुड़िया का पर्व क्यों मनाया जाता है चलिए जानते है इसे बारे में।
आपको बताते चलें कि, नाग पंचमी का त्योहार हर जगह पर अलग-अलग तरह से मनाने की प्रथा होती है तो वहीं पर इसके तरीके भी अलग है। नागपंचमी का खास आयोजन उत्तरप्रदेश में देखा जाता है जहां पर इस जिन पंचमी के मौके पर भाईयों द्वारा गुड़िया पीटने की रस्म निभाई जाती है। इस दिन बहनें और महिलाएं घर में रखें पुराने कपड़ों की गुड़िया बनाती हैं और फिर उसे चौराहे पर लटका देती हैं। इसके बाद उसे बच्चे और भाई डंडों से पीटेते हैं। इसे मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसे लेकर इसकी मान्यता अपनाई जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक लड़का महादेव का परम भक्त था और वह पूजा के लिए रोजाना मंदिर जाता था । उस लड़के को प्रतिदिन वहां नाग देवता के दर्शन होते थे। कहते हैं कि मंदिर जाने के बाद नाग उसके पैरों से लिपट जाता था। एक दिन लड़के की बहन ने यह दृश्य देख लिया और वह काफी भयभीत हो गई। उसे लगा कि कहीं वह नाग उसके भाई को न काट लें, इसलिए उसने नाग को पीट-पीट कर मार डाला। इसके बाद यह बात उसने अपने भाई को बताई और अपनी गलती को पाप बताकर रोने लगी।
वहां उपस्थित लोगों ने कहा कि 'नाग' देवता का रूप होते हैं। तुमने उसे मार दिया इसीलिए तुम्हें सजा तो मिलनी ही चाहिए। यह गलती लड़की से अनजाने में हुई है इसलिए आज से इस दिन लड़की की जगह गुड़िया को पीटा जाएगा। माना जाता है कि तभी से नागपंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा शुरू हुई।