First Time Kanwar Yatra Rules : 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है और इसी दिन से कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाती है। शिव भक्तों को कांवड़ यात्रा का बेसब्री से इंतजार रहता है। हर साल सावन के महीने में लाखों शिवभक्त भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते है।
यदि आप पहली बार कांवड़ यात्रा 2026 में शामिल होने जा रहे हैं, तो केवल भक्ति ही पर्याप्त नहीं है। यात्रा के दौरान कुछ धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। आइए जानते हैं पहली बार कांवड़ लेने वाले श्रद्धालुओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और इसकी धार्मिक मान्यता क्या है।
कांवड़ियों को यात्रा के दौरान कांवड़ की पवित्रता का ख़ास ध्यान रखना चाहिए। गंगाजल से भरी कांवड़ को भूलकर भी सीधे धरती या जमीन पर न रखें। अगर विश्राम करना हो या लघुशंका यानी शौचालय के लिए जाना हो, तो कांवड़ को किसी स्टैंड, ऊंचे स्थान या पेड़ पर टिका दें। जमीन पर स्पर्श होते ही कांवड़ खंडित मानी जाती है।
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले भगवान शिव का नाम जपते हुए संकल्प लेना शुभ माना जाता है। यात्रा के दौरान उसी संकल्प का पूरी श्रद्धा और निष्ठा से पालन करना चाहिए।
कांवड़ यात्रा के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। कांवड़ लेने जाने वाले प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें। कुछ लोग भांग या अन्य नशे का सेवन करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे वर्जित माना गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन के अलावा, खुद की सफाई के साथ-साथ आसपास के वातावरण को भी साफ रखें। प्लास्टिक या कचरा इधर-उधर न फेंकें और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता भी बनाए रखें।
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कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को झूठ और विवाद से बचना चाहिए। कांवड़ यात्रा के दौरान केवल पैदल चलने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम का भी अभ्यास है। इसलिए यात्रा के दौरान क्रोध, किसी को बुरा बोलना, झूठ और विवाद से बचना चाहिए। बस हर समय भगवान शिव का नाम जपना शुभ माना जाता है।
पूरे सफर में नंगे पैर चलना अनिवार्य माना जाता है। भगवा या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। अगर रास्ते में शौच जाना पड़े, तो उसके बाद गंगाजल से स्नान या आचमन करके खुद को पवित्र करना जरूरी है। इस दौरान बाल और नाखून नहीं काटे जाते ।