Janmashtami Puja Niyam: कल 4 सितंबर को पूरे देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन कृष्ण भक्त भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते है। रात के समय उनके जन्म का उत्सव मनाते है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
इस वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को खास महत्व दिया जाता है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि जन्माष्टमी पर विधि-विधान और श्रद्धा से लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकत ऊर्जा का प्रवेश होता है।
लड्डू गोपाल की पूजा करने से सबसे पहले स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद घर की मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर उसे पवित्र करें। सिंहासन को साफ करके तैयार रखें।
स्नान कराने के बाद लड्डू गोपाल को साफ कपड़े से पोंछकर नए और साफ वस्त्र पहनाएं। हो सके तो जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान को पीले रंग के वस्त्र पहनाए। इसके बाद उनका श्रृंगार मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और वैजयंती माला से करें। माथे पर चंदन और केसर का तिलक लगाएं। साथ ही, भगवान को फूलों की माला भी पहनाएं।
लड्डू गोपाल और उनका झूला रखने की दिशा का भी ध्यान रखें। लड्डू गोपाल और उनके झूले के लिए उत्तर-पूर्वल दिशा चुने। यह दिशा शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में भी वास्तु के अनुसार उनकी स्थापना करें।
भगवान श्रीकृष्ण के भोग तुलसी जरूर रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को बेहद प्रिय है। ध्यान रखें कि तुलसी दल को साफ करके ही भोग में अर्पित करें।
लड्डू गोपाल को स्थापना के दिन पंचामृत से स्नान कराएं। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार करें। इससे अभिषेक के बाद साफ जल से स्नान कराएं। फिर उन्हें नए और मुलायम पीले वस्त्र पहनाएं।
जन्माष्टमी पर रात में उन्हें माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा मखाने की खीर, पंजीरी, पंचमेवा और अन्य सात्विक पकवान भी भोग में शामिल कर सकते हैं।
लड्डू गोपाल की पूजा श्रद्धा पूर्वक करें जैसे बाल भाव है। इसलिए जन्माष्टमी के दिन लड्डूगोपल को झूला जरूर झुलाएं और उनकी आरती गाएं।