होलिका दहन (सौ.AI)  
धर्म

होलिका दहन के लिए जरूरी सामग्री की लिस्ट नोट कीजिए, जानिए किस दिशा में जलाएं होलिका

Holika Dahan Vidhi: होलिका दहन के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की पूरी सूची के साथ ही जानिए किस दिशा में होलिका जलाना शुभ माना जाता है। सही विधि और दिशा का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

सीमा कुमारी

Holika Dahan Puja Samagri List: होलिका दहन का पर्व हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं कि होलिका की अग्नि जीवन में फैली बुराईयों व निगेटिविटी को दूर करती है।

पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 03 मार्च को शाम 06 बजकर 22 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस समय विधि-विधान से पूजा और दहन करना शुभ माना गया है।

होलिका दहन के लिए जरूरी पूजन सामग्री

  • रोली और अक्षत
  • फूल और माला
  • हल्दी और गुलाल
  • कच्चा सूत (मौली)
  • गुड़
  • नारियल
  • गेहूं या जौ की बालियां
  • पानी से भरा लोटा
  • अगरबत्ती या दीपक

इन पूजा सामग्रियों से विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि

  • शाम को स्नान कर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • परिवार के साथ होलिका स्थल पर जाएं।
  • होलिका के सामने जल से आचमन करें।
  • भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें।
  • रोली, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित करें।
  • कच्चा सूत (मौली) होलिका पर लपेटें।
  • हल्दी, गुलाल और गुड़ चढ़ाएं।
  • नारियल और गेहूं या जौ अर्पित करें।
  • शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें।
  • अग्नि में अपनी नकारात्मक सोच और बुराइयों को समर्पित करने का संकल्प लें।

सही दिशा का ध्यान क्यों जरूरी है?

होलिका दहन के समय दिशा का विशेष महत्व माना जाता है। यदि संभव हो तो होलिका पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलानी चाहिए और पूजा करते समय भी पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही दिशा में पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

होलिका की परिक्रमा का महत्व

पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर कम से कम 3 या 7 बार परिक्रमा करते हैं। इस दौरान भगवान का नाम लेते हुए परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि परिक्रमा करने से रोग, दोष और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। महिलाएं विशेष रूप से अपने परिवार की रक्षा और खुशहाली के लिए श्रद्धा भाव से परिक्रमा करती हैं।

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