Gupt Navratri Kalash Sthapana Time: आज यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो रही है। सनातन परंपरा में गुप्त नवरात्रि को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक साधना का समय माना गया है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तुलना में यह पर्व अधिकतर साधना, मंत्र जाप और देवी आराधना के लिए प्रसिद्ध है।
इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्र में व्रत और साधना करने से साधक को जीवन के सभी भय से छुटकारा मिलता है।
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 12 मिनट पर हो गई है। वहीं, इस तिथि का समापन 15 जुलाई सुबह को 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, आज यानी 15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्र की शुरुआत हुई है।
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना करने का खास विधान है। इस बार यह शुभ तिथि 15 जुलाई को है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त का 15 जुलाई को सुबह 06 बजकर 01 मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक रहने वाला है।
इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग और सिद्ध योग जैसे अत्यंत मंगलकारी संयोगों में हो रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से ये योग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक गूढ़ और साधना प्रधान मानी जाती है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस नवरात्रि का ज्ञान केवल ऋषियों, सिद्ध पुरुषों और साधकों तक ही सीमित था। वे इन नौ दिनों में विशेष साधना और देवी उपासना के माध्यम से आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति का प्रयास करते थे।
मान्यता है कि जो साधक पूरे श्रद्धाभाव से इन नौ दिनों में व्रत, जप, हवन और देवी आराधना करता है, उसे देवी की कृपा से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करें।
मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोएं।
एक कलश में जल भरे और कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालें।
कलश के ऊपर एक नारियल को लाल चुनरी को लपेटकर रखें।
कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाकर धूप-दीप जलाएं।
मां दुर्गा की आरती करें।
दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
फल और मिठाई का भोग लगाएं।
आखिरी में सभी लोगों में प्रसाद बाटें।