मां दुर्गा (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

कब है फाल्गुन दुर्गा अष्टमी? जानिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त, विधिवत पूजा से मिलेगी कष्टों से मुक्ति

Spiritual Benefits: फाल्गुन दुर्गा अष्टमी 2026 का पर्व बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और देवी माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सीमा कुमारी

Falgun Durga Ashtami: 24 फरवरी को फाल्गुन महीने की मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी। फाल्गुन माह की दुर्गा अष्टमी के दिन विशेष पूजा और व्रत का महत्व है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव से जुड़ी होती है, जबकि शुक्ल पक्ष की अष्टमी मां दुर्गा को समर्पित होती है। इस दिन भक्त भक्ति भाव से शिव-शक्ति की पूजा करते हैं और मनचाही मुराद पूरी करने के लिए व्रत रखते हैं।

मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ मुहूर्त

फाल्गुन माह की मासिक दुर्गा अष्टमी 2026 में 24 फरवरी को सुबह 07:01 बजे शुरू होकर 25 फरवरी को सुबह 04:51 बजे समाप्त होगी। इस अवसर पर जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा निशा काल में की जाती है।

मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ योग

फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे इन्द्र और त्रिपुष्कर योग। रोहिणी नक्षत्र के संयोग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

पंचांग अनुसार सूर्योदय सुबह 06:51 बजे, सूर्यास्त शाम 06:18 बजे, चंद्रोदय सुबह 10:58 बजे और चंद्रास्त रात 01:40 बजे तक है।

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:11 से 06:01 बजे, विजय मुहूर्त दोपहर 02:29 से 03:15 बजे, गोधूलि मुहूर्त शाम 06:15 से 06:40 बजे और निशिता मुहूर्त रात 12:09 से 12:59 बजे तक है।

मासिक दुर्गा अष्टमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

मासिक दुर्गा अष्टमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह दिन देवी दुर्गा की पूजा और व्रत का विशेष अवसर है। इस दिन भक्ति भाव से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और मानसिक स्थिरता आती है। व्रत रखने से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। विशेष रूप से निशा काल में पूजा करने से देवी की कृपा अधिक फलदायी मानी जाती है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन बनने वाले शुभ योग पूजा को और प्रभावशाली बनाते हैं। मासिक दुर्गा अष्टमी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक लाभ देने वाला पर्व भी है।

कैसे करें मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को साफ करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • माता को लाल वस्त्र से ढकें।
  • गंगाजल से माता का स्नान कराएं।
  • चंदन, रोली, सिंदूर और फूल अर्पित करें।
  • फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • दुर्गा मंत्रों का जाप और दुर्गा स्तुति का पाठ करें।
  • मां दुर्गा की आरती करें।
  • कन्याओं को भोजन कराएं और दान दें।

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