बेटी के विवाह से पहले कर लें ये टोटके 
धर्म

बेटी के विवाह से पहले कर लें ये टोटके, विदाई के बाद भी भरा रहेगा घर धन-धान्य से

कई बार देखा जाता है कि शादी यानी विवाह के बाद जब बेटियां विदाई होकर अपने ससुराल जाती हैं तो साथ में मायके की सुख समृद्धि भी ले जाती है, क्योंकि हिन्दू धर्म में बिटिया को भाग्यशाली माना जाता है और बिटिया से ही घर में रौनक रहती है। बेटी की विदाई से पहले माता-पिता को एक काम जरूर करना चाहिए।

सीमा कुमारी

हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। ऐसे में कई बार देखा जाता है कि शादी यानी विवाह के बाद जब बेटियां विदाई होकर अपने ससुराल जाती हैं तो साथ में मायके की सुख समृद्धि भी ले जाती है, क्योंकि हिन्दू धर्म में बिटिया को भाग्यशाली माना जाता है और बिटिया से ही घर में रौनक रहती है।

सुख समृद्धि और लक्ष्मी जी का आगमन होता है। ऐसे में लक्ष्मी जी की विदाई होना कई बार कुछ घरो के लिए काफी अशुभ हो जाता है। ऐसे में ज्योतिष आचार्य संतोष कुमार चौबे बताते हैं कि बेटी की विदाई से पहले माता-पिता को एक काम जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में-

माता-पिता बस कर लें एक काम

ज्योतिष आचार्य के अनुसार, बेटी की विदाई से पहले माता-पिता को एक काम करना चाहिए। एक सफेद चादर लें और उसमें बेटी के पैरों के निशान लें।

आप लाल आल्ता के पानी में बेटी के पैर को डुबोकर उसका निशान ले सकते हैं और फिर उस व्हाइट कलर की चादर को फ्रेम करवा लें। फिर इसे अपनी तिजोरी में रख दें।

कहते है ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि और माता लक्ष्मी का आगमन होता रहेगा। सौभाग्य दोगुना होकर मिलेगा, घर में बरकत होती रहेगी। ऐसा हर मां-बाप को बेटी की विदाई के बाद जरूर करना चाहिए, इससे घर भरा पूरा रहता है।

ससुराल में नहीं होगी कोई परेशानी

बेटी को विदा करने से पहले एक लोटे में जल भरकर उसमें हल्दी और एक तांबे का सिक्का डाल दें। इस जल से भरे लोटे को बेटी के सिर के ऊपर से 7 बार घुमाएं और फिर इस लोटे को बेटी के हाथ में रख दें।

जब बेटी विदा हो जाए तो इस लोटे के जल को पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें। ऐसा करने से बेटी को ससुराल में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बेटी की शादी से एक दिन पहले उसके हाथों से तीन मेंहदी के पैकेट का दान करवाएं। मेहंदी के पैकेट में से एक पैकेट काली मां के मंदिर में चढ़ा दें।

मेहंदी का दूसरा पैकेट किसी सुहागिन को दान कर दें और तीसरे पैकेट में से किसी सुहागिन महिला को मेहंदी लगा दें और फिर उस पैकेट से ही बेटी के हाथ में भी मेहंदी लगवा दें। ऐसा करने से बेटी को शादी के बाद किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी।

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