रंगोली फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Diwali Rangoli: त्योहारों पर घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली क्यों बनाते हैं? जानिए इस परंपरा का खास महत्व

Diwali Rangoli Significance: दिवाली पर घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाने की परंपरा सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं है। जानिए इसे शुभता, देवी लक्ष्मी के स्वागत और भारतीय संस्कृति से जुड़ा इसका महत्व।

रीता राय सागर

Highlights:

  • दिवाली पर रंगोली बनाना शुभता और स्वागत का प्रतीक माना जाता है।

  • कोलम, मुग्गु और अल्पना भारत की पारंपरिक रंगोली शैलियां हैं।

  • कमल, दीपक और फूलों के डिजाइन से सजता है घर का मुख्य दरवाजा।

Home Entrance Diwali Rangoli: दिवाली आते ही घरों की सफाई और सजावट शुरू हो जाती है। कोई दरवाजे पर तोरण लगाता है, तो कोई रंग-बिरंगी लाइटों और दीयों से घर को सजाता है। इस दौरान मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाना बेहद खास होता है। कहीं रंगों से खूबसूरत आकृतियां बनाई जाती हैं, तो कहीं फूलों की पंखुड़ियों, चावल के आटे या पारंपरिक डिजाइनों से फर्श और एंट्री गेट को सजाई जाती है।

हिंदू परंपराओं में रंगोली को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर कई परिवार इसे देवी लक्ष्मी के स्वागत और घर में सुख-समृद्धि की कामना मानते हैं।

शुभता और देवी लक्ष्मी का स्वागत

दिवाली पर घर के प्रवेश द्वार को साफ-सुथरा और सजाकर रखने की परंपरा है। कई परिवारों में रंगोली को देवी लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पूजा के दिन मुख्य दरवाजे पर कमल, शुभ चिह्न, स्वास्तिक, दीपक और फूलों के डिजाइन बनाए जाते हैं। ऐसा करना घर में सुख-समृद्धि और मंगल कामना लेकर आता है।

मेहमानों के स्वागत का तरीका

मुख्य दरवाजा घर का प्रवेश स्थान होता है। रंगोली इसे सुंदर और आकर्षक बनाने के साथ त्योहार के माहौल को भी खास बनाती है। भारतीय संस्कृति में शुभ अवसरों पर प्रवेश द्वार सजाना मेहमानों के स्वागत और खुशी जाहिर करने का तरीका रहा है। दिवाली पर रंगोली के साथ फूलों का तोरण और दीपक लगाने से घर की सजावट और निखर जाती है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में रंगोली के अलग नाम

भारत में जमीन पर शुभ आकृतियां बनाने की परंपरा कई रूपों में देखने को मिलती है। महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे रंगोली कहा जाता है। तमिलनाडु में कोलम, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मुग्गु और बंगाल व बिहार के कई हिस्सों में अल्पना जैसी पारंपरिक शैलियां बनाई जाती हैं। कहीं चावल के आटे से बारीक डिजाइन बनाए जाते हैं, तो कहीं रंगों और फूलों की पंखुड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है।

रंगोली में कमल और दीपक के मायने

दिवाली के दौरान कमल, दीपक, फूल और पारंपरिक शुभ चिह्नों वाले डिजाइन खूब पसंद किए जाते हैं। कमल को कई हिंदू परंपराओं में देवी लक्ष्मी से जोड़ा जाता है, जबकि दीपक प्रकाश और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

रंगोली बनाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल होता है

रंगोली बनाने के लिए बाजार में मिलने वाले रंगों के अलावा फूलों की पंखुड़ियां, चावल का आटा और रंगीन चावल भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियों से बनी रंगोली दिवाली की सजावट में खूबसूरत लगती है। अगर कम समय है, तो स्टेंसिल की मदद से भी आकर्षक डिजाइन बनाया जा सकता है। आजकल बाजार में रेडिमेड रंगोली भी मिलते हैं।

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