Shri Premanand Ji Maharaj Mind Power: प्रसिद्ध संत Shri Premanand Ji Maharaj के अनुसार, इंसान की सबसे बड़ी शक्ति उसका मन है। वे कहते हैं "जिस दिन आप जो ठान लेंगे, वैसा ही होने लग जाएगा।" यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है। हम सभी परमेश्वर के अंश हैं, इसलिए हमें किसी बाहरी चीज़ की असल में आवश्यकता नहीं होती। दुख तब पैदा होता है जब हम खुद को केवल शरीर तक सीमित मान लेते हैं।
आज के समय में लोग आरामदायक जीवन जीते हुए ऊंची आध्यात्मिक स्थिति पाना चाहते हैं, लेकिन बिना अनुशासन के यह संभव नहीं है। शरीर को जैसे ढालना चाहें, वह वैसा बन सकता है। शुरुआत में कठिनाई होती है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर उसी आदत में ढल जाता है। इसलिए हर पल को सार्थक बनाना जरूरी है जीवन केवल समय काटने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए मिला है।
भजन और साधना कोई आसान काम नहीं है, यह मन के साथ एक गहरा संघर्ष है। जब आप ध्यान में बैठते हैं, तो मन आपको भटकाने की कोशिश करता है। ऐसे समय में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दृढ़ता से उसका सामना करना चाहिए। अगर मन ज्यादा भटकने लगे, तो जोर से भजन गाकर उसे नियंत्रित किया जा सकता है। यही अभ्यास धीरे-धीरे मन को स्थिर बनाता है।
भजन करते समय तीन तरह की चिंताएं सबसे ज्यादा परेशान करती हैं:
इन तीनों को छोड़कर ही सच्ची साधना संभव है। जब मन पूरी तरह समर्पित होता है, तब ही शांति मिलती है।
भगवत मार्ग पर चलने के लिए एक मजबूत और जिद्दी स्वभाव जरूरी है। आपकी दिनचर्या ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी परिस्थिति चाहे गर्मी हो, बीमारी हो या कोई परेशानी आपकी साधना को रोक न सके। अगर आप अपनी दिनचर्या को ही भगवान मान लें, तो जीवन में कोई भी बाधा आपको हरा नहीं सकती।
एक साधक के लिए सबसे बड़ा दुश्मन क्रोध होता है। क्रोध इंसान की सोचने और समझने की शक्ति को खत्म कर देता है। वहीं, जो व्यक्ति सही रास्ते पर चलता है और दूसरों के भले की सोचता है, उसकी मदद खुद दैवी शक्तियां करती हैं।
यह शिक्षा साफ है अगर आप अपने मन को नियंत्रित कर लें और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो आपकी सोच ही आपकी हकीकत बन सकती है। इसलिए बिना डर के सही मार्ग पर चलें और अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी ताकत लगा दें।