नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के साथ क्यों बोया जाता है जौ? जानिए इसकी असली वजह और धार्मिक महत्व

Kalash Ke Sath Jau Kyu Boye: चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा का विशेष महत्व है। जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और क्यों इसे शुभता व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

सीमा कुमारी

Chaitra Navratri 2026 Jau Importance: देवी की उपासना के लिए नवरात्रि का दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 से होने जा रही है। इस दौरान नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।

नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा

नवरात्रि में घटस्थापना के समय मिट्टी में जौ बोने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि जौ बोने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है। माना जाता है कि नवरात्रि में बोए गए जौ अकर अच्छ रूप से अंकुरित और विकसित होते हैं तो इसका मतलब है कि आपके घर में समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी।

सृष्टि की पहली फसल का सम्मान

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी, तब वनस्पतियों में सबसे पहली फसल जौ उगी थी। यही कारण है कि जौ को ‘पूर्ण धान्य’ माना जाता है। नवरात्रि के दौरान जौ बोकर हम सृष्टि के आरंभ का स्मरण करते हैं और अन्न के रूप में ब्रह्मा जी का सम्मान करते हैं।

अन्न में ब्रह्म का वास

हिंदू धर्म में अन्न को देवता माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है – “अन्नं वै ब्रह्म”, यानी अन्न ही ब्रह्म है। नवरात्रि में जौ बोना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए माँ दुर्गा और अन्न देवता का आशीर्वाद मांग रहे हैं।

नवरात्रि में जौ बोने की विधि

  • नवरात्रि के दौरान जौ बोना बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • इसके लिए सबसे पहले एक मिट्टी या कांसे का पात्र लें और उसमें साफ मिट्टी भरें।
  • इसके बाद उसमें हल्का पानी डालें ताकि मिट्टी नम हो जाए।
  • अब जौ के दानों को इस मिट्टी में बो दें।
  • अब इस पात्र को घर के पूजा स्थल या किसी साफ-सुथरे स्थान पर रखें।
  • पूरे नवरात्रि के दौरान इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी देते रहें।
  • जब जौ हरे-भरे होकर उग जाएं, तब इसे माँ दुर्गा के चरणों में चढ़ा सकते हैं।

कलश स्थापना की विधि

  • नवरात्रि में कलश स्थापना पूजा का मुख्य भाग होती है, जिसे विधि-विधान से करना जरूरी है।
  • सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
  • इसके बाद मिट्टी की वेदी या लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • अब जौ बोने के लिए मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी और जौ की परतें लगाकर उसे तैयार करें और इसे कलश के नीचे या बगल में रखें।
  • इसके बाद तांबे या मिट्टी के कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में मौली बांधें।
  • कलश के अंदर शुद्ध जल, गंगाजल, एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, दूर्वा और हल्दी की गांठ डालें।
  • इसके बाद कलश के मुंह पर आम या अशोक के 5 से 7 पत्ते रखें।
  • नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर इस तरह रखें कि उसका मुख आपकी ओर रहे।
  • अंत में कलश को जौ वाले पात्र के बीच स्थापित करें और देवी-देवताओं का आवाहन करें।
  • कलश के दाईं ओर घी या तेल का दीपक जलाकर अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और पूजा का संकल्प लें।

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