भीष्म पितामह (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

भीष्म अष्टमी के दिन करें इन विशेष चीजों का दान, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

Bhishma Ashtami Donation: भीष्म अष्टमी के पावन अवसर पर अनाज, दूध, घी, फल, मिठाई और वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

सीमा कुमारी

Bhishma Ashtami 2026: भीष्म अष्टमी महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है। इसे भीष्म जयन्ती भी कहा जाता है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी या अष्टमी तिथि को पड़ता है और विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। साल 2026 में यह अष्टमी सोमवार, 26 जनवरी को पड़ रही है।

इस दिन लोग भीष्म पितामह की भक्ति और तपस्या को याद करते हुए व्रत रखते हैं, उनके जीवन और ज्ञान से प्रेरणा लेते हैं, और धार्मिक कर्मकांडों में हिस्सा लेते हैं।

हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस शुभ तिथि पर कुछ चीजों का दान करना बहुत ही शुभ एवं पुण्यदायी माना जाता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

भीष्म अष्टमी के दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। परंपरा और शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दान करने से मृत्यु का भय कम होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। खासकर ये चीजें दान करना लाभकारी होता है-

भीष्म अष्टमी के दिन क्या दान करें

अनाज और अन्न

भीष्म अष्टमी के दिन चावल, गेहूं, दालें, मूंग, चना आदि दान करने से जीवन में स्थिरता और खुशहाली आती है। अगर आप चाहते है कि आपके जीवन में खुशहाली एवं सुख समृद्धि बनी रहे है इस दिन इन चीजों का दान करना न भूलें।

वस्त्र का दान

भीष्म अष्टमी के दिन गरीबों, वृद्धों या जरूरतमंदों के बीच वस्त्र का दान अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

तिल और घी

इस दिन तिल या तिल का तेल, घी आदि दान करना भी शुभ माना जाता है।

फल और मिठाई

विशेषकर केसरयुक्त या शुद्ध गुड़-मिठाई गरीबों और ब्राह्मणों को देने से पुण्य बढ़ता है।

धार्मिक पुस्तकें और ज्ञान

ऐसी मान्यता है कि, इस दिन धार्मिक ग्रंथ या विद्या के साधन गरीब या अध्ययनशील विद्यार्थियों को दान करना भी फलदायी है।

पानी और भोजन

इस दिन प्यासे और भूखे लोगों को पानी, भोजन या फल देना अत्यंत शुभ है।

भीष्म अष्टमी के दिन करना न भूलें ये काम भी

भीष्म अष्टमी के दिन गाय को हरा चारा और हरी सब्जियां खिलाना भी काफी शुभ माना गया है। इससे मानसिक तनाव दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

साथ ही इस दिन पर जातक भीष्म तर्पण अर्थात भीष्म पितामह के निमित्त जल अर्पण करते हैं, जिसके लिए तिल, कुश और जल का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि इससे जातक को पापों से मुक्ति और वंश वृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है।

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