Shiv Tandav Stuti:भारत पाकिस्तान तनाव के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद से सीमा पर शांति बहाल हो गई है। हालांकि भारत ने ऐलान करते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है क्योंकि हमारी लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है। इस दौरान आज सेना के तीन महानिदेशक यानी DGMO, DGAO, DGNO ने आज फिर एक बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद पाकिस्तान पर प्रहार को लेकर पूरी जानकारी दी।
आपको बता दें, इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल ए.के. भारती ने इन पूरे हालातों पर जब संदेश देने के लिए कहा तो उन्होंने रामचरित मानस की एक चौपाई सुनाई, ‘बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीति…’. मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाने वाले श्रीराम, जो सदैव दया की मूरत और धैर्य का पर्याय माने जाते थे, उन्हें भी ‘भय दिखाने और क्रोध’ की जरूरत पड़ गई थी। इस चौपाई के पीछे गहरा संदेश छिपा है। आइए जानते है कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल ए.के. भारती ने क्यों किया रामचरित मानस की चौपाई का जिक्र?
हिन्दू धर्म में शिव तांडव स्तोत्र को बहुत चमत्कारी माना जाता है। इसकी रचना रावण द्वारा की गई है। कहा जाता है कि एक बार अहंकारवश रावण ने कैलाश को उठाने की कोशिश की तो भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबाकर स्थिर कर दिया, जिससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। तब पीड़ा में रावण ने भगवान शिव की स्तुति की।
रावण द्वारा की गई यह स्तुति शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जानी जाती है। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अन्य किसी भी पाठ की तुलना में भगवान शिव को अधिक प्रिय है। इसका पाठ करने से शिव जी बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं शिव तांडव स्तोत्र के फायदे और पाठ करने की विधि...
शिव तांडव स्तोत्र पाठ के फायदे
नियमित रूप से शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं।
इसका पाठ करने से कभी भी धन-सम्पति की कमी नहीं होती है।
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने वाले व्यक्ति का चेहरा तेजमय होता है और आत्मबल मजबूत होता है।
शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने से मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से कुडंली में शनि का कुप्रभाव कम होता है।
जिन लोगों की कुण्डली में सर्प योग, कालसर्प योग या पितृ दोष हो उन्हें भी शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
शिव तांडव स्तोत्र की विधि
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ सुबह या शाम को प्रदोष काल में करना चाहिए।
इसके लिए सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर भगवान भोलेनाथ को प्रणाम करें और धूप, दीप और नैवेद्य से उनका पूजन करें।
मान्यता है कि रावण ने पीड़ा के कारण इस स्तोत्र को बहुत तेज स्वर में गाया था, इसलिए आप भी गाकर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान शिव का ध्यान करें।