Bel Patra Plucking Rules: सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का बहुत बड़ा स्थान हैं। इसके बिना शिवजी की आराधना अधूरी मानी जाती हैं। लेकिन बहुत लोग जानते हैं कि बेलपत्र को पेड़ से तोड़ने के कुछ नियम होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गलत समय या तिथि पर बेलपत्र तोड़ने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और अनजाने में दोष भी लग सकता है। आइए जानते हैं बेलपत्र तोड़ने के सही नियम और चढ़ाने का तरीका।
सोमवार के दिन
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन इस दिन बेलपत्र तोड़ना गलत माना जाता है। सोमवार की पूजा के लिए आपको रविवार को ही बेलपत्र तोड़कर रख लेना चाहिए।
विशेष तिथियों
इसके अलावा, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के दिन भी बेलपत्र तोड़ने की मनाही है।
संक्रांति के दिन
कहा जाता है कि, संक्रांति के दिन भूलकर भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इस दिन भी बेलपत्र को तोड़ना वर्जित माना गया है।
सूर्यास्त के बाद
सूर्यास्त यानी शाम में बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय बेलपत्र के पेड़ को भी स्पर्श न करें।
पेड़ को प्रणाम करें
बेलपत्र तोड़ने से पहले मन में भगवान शिव का ध्यान करें और पेड़ को प्रणाम कर के बेलपत्र तोड़ें।
टहनी या डाली न तोड़े
बेलपत्र तोड़ते समय ध्यान रखें कि पेड़ की टहनी या डाली न टूटें। बेल के पेड़ की पूरी टहनी कभी नहीं तोड़नी चाहिए वरना दोष लगता है। हमेशा पत्ते ही तोड़ने चाहिए।
कटा-फटा बेलपत्र न चढ़ाएं
भगवान शिव की पूजा में हमेशा वही बेलपत्र इस्तेमाल करें जिसमें तीन पत्ते एक साथ जुड़े हों। कटा-फटा या धारी वाला बेलपत्र शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए हमेशा तीन पत्तों वाला बेलपत्र ही चुनना चाहिए। ध्यान रखें कि पत्ता कहीं से कटा-फटा न हो और न ही सूखा हो।
शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टा कर के चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग पर रहे। शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है लेकिन आप इससे अधिक बेल पत्र भी चढ़ा सकते हैं। वहीं अगर आपके पास बेलपत्र अधिक नहीं हैं तो आप एक ही बेलपत्र को पानी से धोकर बार-बार चढ़ा सकते हैं।