मां बगलामुखी ( Gemini डिजाइन फोटो) 
धर्म

Bagalamukhi Jayanti: माता बगलामुखी की पूजा के ये 10 जरूरी नियम जान लीजिए, मां के इस स्वरूप की महिमा पढ़ें

Baglamukhi Devi:बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर मां बगलामुखी की पूजा के विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सही विधि और श्रद्धा से की गई साधना से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है।

सीमा कुमारी

Maa Baglamukhi Ki Puja Ke Niyam: आज 24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती मनाई जा रही है। यह जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी का जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में मां बगलामुखी को शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी बताई गई है।

हिंदू मान्यता के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा करने वाले भक्त को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में जीत हासिल होती है, लेकिन 10 महाविद्या में से आठवीं देवी मां बगलामुखी की पूजा के लिए शास्त्रों में कुछेक विशेष नियम बताए गये हैं, जिनका पालन किए बगैर देवी की साधना पूर्ण नहीं होती है। ऐसे में आइए जानते है मां बगलामुखी की पूजा से जुड़े जरूरी नियम जानते हैं-

मां बगलामुखी जयंती का महत्व

मान्यता है कि मां बगलामुखी की पूजा करने से न केवल शत्रुओं का नाश होता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, कोर्ट-कचहरी के मामले और मानसिक तनाव भी दूर हो जाते हैं। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में 'दश महाविद्याओं' की उत्पत्ति की कथा मिलती है, जिसमें मां बगलामुखी जयंती के महत्व को बताया गया है।

मां बगलामुखी की पूजा से जुड़े क्या है जरूरी नियम?

  • हिंदू मान्यता के अनुसार, मां बगलामुखी की पूजा या साधना यदि किसी पवित्र स्थान पर किसी सिद्ध पुरुष के निर्देशन में की जाए, तो शीघ्र सफलता प्राप्त होती है।
  • मां बगलामुखी (Maa Baglamukhi)की साधना हमेशा किसी सिद्ध गुरु की आज्ञा और मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए। साधना के दौरान गुरु के सभी निर्देशों और पूजा नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • साधना करने वाले साधक को देवी की पूजा और व्रत के समय पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए साधक को पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • देवी की पूजा में उपयोग होने वाली अधिकांश सामग्री भी पीले रंग की होती है, जो साधना को और अधिक प्रभावी बनाती है।
  • मां बगलामुखी की साधना हमेशा गुप्त रूप से करनी चाहिए। देवी की पूजा खुले आकाश के नीचे करने से बचना चाहिए।
  • इस दिव्य स्वरूप की साधना और मंत्र जप रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे के बीच अधिक प्रभावी माने जाते हैं। बगलामुखी मंत्रों का जप हल्दी की माला से करना शुभ माना गया है।
  • किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान या शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी के यंत्र की विशेष पूजा करनी चाहिए।
  • साधना के दौरान साधक को एक समय का व्रत रखना चाहिए, जिसमें नमक और शक्कर का त्याग किया जाता है। इस दौरान फलाहार करना उचित माना गया है।
  • मां बगलामुखी जयंती के दिन नाखून, दाढ़ी और बाल कटवाने से बचना चाहिए।

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