Hanuman Ji Ki Puja: आज ज्येष्ठ मास का सातवां सबसे बड़ा मंगलवार है। आज के बड़े मंगल का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन संकट मोचन भगवान हनुमान की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सातवां बड़ा मंगल भक्तों के लिए विशेष अवसर होता है, जब वे हनुमान जी को प्रसन्न कर सकते है। इसके लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी को उनका प्रिय भोग लगाने से आपके सारे रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं।
बजरंग बली को प्रसन्न करने का अचूक उपाय है, उन्हें आटे और गुड़ का चूरमा भोग प्रसाद के रूप में चढ़ाना, लेकिन इसके लिए कुछ नियमों का पालन आवश्यक है।
प्रभु श्री राम के परम भक्त हैं हनुमान जी। हिंदू धर्म में जब भी प्रभु को भोग लगाया जाता है, साथ में तुलसी दल रखना अनिवार्य होता है। बजरंगबली को चढ़ाए जाने वाले नैवेद्य में जब तक तुलसी का पत्ता नहीं रखा जाता है, तब तक उसे पूर्ण नहीं माना जाता। प्रसाद में तुलसी दल रखने के बाद ही हनुमान जी उस भोग को सहर्ष स्वीकार करते हैं, इसलिए चूरमे के ऊपर तुलसी का पत्ता रखना कभी न भूलें।
आर्थिक संकट के निवारण और कर्ज मुक्ति के लिए हनुमान जी की पूजा का सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के ठीक बाद यानी प्रदोष काल माना गया है। मान्यता है कि शाम के समय हनुमान जी अपने भक्तों की पुकार सबसे जल्दी सुनते हैं। मंगलवार की शाम को स्वच्छ वस्त्र धारण कर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीप प्रज्वलित करें और फिर इस दिव्य चूरमे का भोग अर्पण करें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुड़ और गेहूं का संबंध सीधे सूर्य और मंगल ग्रह से है। जब इन दोनों को शुद्ध देसी घी के साथ मिलाकर हनुमान जी को चढ़ाया जाता है, तो कुंडली में मंगल और सूर्य मजबूत होते हैं। इस टोटके से समाज में मान प्रतिष्ठा बढ़ती है और धन आगमन के द्वार खुलते हैं। ध्यान रहे, मंगलवार के दिन घर में पूरी तरह सात्विक माहौल हो और भूलकर भी तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन या मांस-मदिरा) का सेवन न करें।
सिर्फ भोग लगा देना काफी नहीं है, भोग लगाने के बाद हनुमान जी के सामने बैठकर कम से कम 3 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें या “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जप करें। इसके बाद बजरंगबली से अपने घर की दरिद्रता और कंगाली को दूर करने के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें। आपकी बंद किस्मत के ताले खुल जाएंगे।
पूजा संपन्न होने के बाद चूरमे के प्रसाद को सबसे पहले पूरे परिवार के सदस्यों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। यदि संभव हो, तो इस प्रसाद का कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद या गाय या वानर को जरूर खिलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।