Rajasthan Building Accident: कोटा के तलवंडी इलाके में शनिवार रात उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब एक तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि राहत और बचाव दल ने मलबे में दबे 15 लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
राजस्थान के कोचिंग हब कहे जाने वाले कोटा शहर में शनिवार रात एक बड़ा हादसा पेश आया। तलवंडी इलाके में स्थित एक तीन मंजिला इमारत, जिसमें एक फूड आउटलेट संचालित हो रहा था, अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया और मलबे के नीचे से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं।
हादसे के वक्त रेस्टोरेंट में कई कर्मचारी और ग्राहक मौजूद थे, जिन्हें बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन दल के साथ-साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत कार्य शुरू किया गया।
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक मलबे से कुल 15 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें से दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 13 घायल अस्पताल में भर्ती हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल संगीता सक्सेना ने बताया कि अस्पताल लाए गए घायलों में से कुछ की स्थिति स्थिर है और मामूली चोटों वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। बचाव दल के एक सदस्यभी रेस्क्यू के दौरान चोटिल हो गया है। जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और सिटी एसपी लगातार मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में इस भीषण हादसे के पीछे बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। कोटा कलेक्टर के अनुसार, गिरी हुई इमारत के ठीक बगल में एक पुरानी बिल्डिंग को हाल ही में तोड़ा गया था, जिससे इस इमारत की नींव कमजोर हो गई थी। वहीं, कोटा डिविजनल कमिश्नर अनिल कुमार अग्रवाल ने बताया कि कुछ स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि वहां ड्रिलिंग और नया कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था, जो नियमों के खिलाफ हो सकता है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी घटना की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
हादसे के बाद राजस्थान सरकार के मंत्री मदन दिलावर ने न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और बेहतर इलाज के निर्देश दिए। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी घटना पर गहरा दुःख जताया है और राहत कार्यों को तेज करने के लिए जिला प्रशासन से बात की है।
हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी भी देखी गई। लोगों का आरोप है कि मलबे को हटाने के लिए जरूरी क्रेन लगभग डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची, जिसके कारण शुरूआती बचाव कार्य की रफ्तार काफी धीमी रही। फिलहाल मलबा हटाने का काम जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति अंदर न दबा हो।